मोदी पहुंचे इजराइल, उनके विमान को दुनिया के इतने हजार लोगों ने किया ट्रैक

PM Modi Israel Visit : पीएम मोदी इजरायल पहुंचे हैं। वो भारत सरकार के विशेष विमान एअर इंडिया वन से पहुंचे। यह विमान देश के प्रधानमंत्री और अन्य उच्च पदाधिकारियों के लिए इस्तेमाल होता है।
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पीएम मोदी के स्वागत में एयरपोर्ट पर खड़े इजराइली पीएम और उनकी पत्नी।
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PM Modi Israel Visit Latest News : डिजिटल युग में कूटनीति अब केवल बंद कमरों तक सीमित नहीं है, बल्कि आसमान में उड़ते विमानों पर भी पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहती हैं। बुधवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी ऐतिहासिक यात्रा पर इजरायल के लिए रवाना हुए तो उनका विमान एयर इंडिया वन दुनिया का सबसे चर्चित और ट्रैक किया जाने वाला विमान बन गया।

लाइव फ्लाइट ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म फ्लाइटरडार24 के आंकड़ों ने साबित कर दिया कि वैश्विक राजनीति में पीएम मोदी का मूवमेंट कितना मायने रखता है। प्रधानमंत्री मोदी का यह सफर रणनीतिक रूप से बेहद सतर्कता भरा रहा। उनके विशेष विमान Boeing 777-300ER ने एक ऐसा रूट चुना जिसने सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान और ईरान के एयरस्पेस को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। दिल्ली से उड़ान भरने के बाद विमान गुजरात से होता हुआ अरब सागर के ऊपर से ओमान पहुंचा और वहां से सऊदी अरब के आकाश में दाखिल हुआ।

दुनिया भर के 7184 लोग कर रहे थे विमान को ट्रैक

शाम पौने चार बजे जब यह विमान सऊदी अरब को पार कर जॉर्डन की सीमा में प्रवेश कर रहा था, तब दुनिया भर के 7184 लोग इसे एक साथ लाइव ट्रैक कर रहे थे। यह संख्या उस समय 'फ्लाइटरडार' पर किसी भी अन्य विमान की तुलना में सबसे अधिक थी। जॉर्डन के ठीक बाद इजरायल की सीमा शुरू हुई और विमान सुरक्षित रूप से तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर लैंड हुआ।

एयर इंडिया वन : हवा में उड़ता कमांड सेंटर

पीएम मोदी जिस एयर इंडिया वन से यात्रा कर रहे हैं, वह केवल एक विमान नहीं बल्कि अत्याधुनिक तकनीक से लैस एक किला है। इसमें अपना मिसाइल डिफेंस सिस्टम, सिक्योर सैटेलाइट कम्युनिकेशन और एक पूर्ण विकसित कमांड सेंटर है, जिससे प्रधानमंत्री किसी भी आपात स्थिति में सीधे भारत से संपर्क साध सकते हैं।

बदलते वैश्विक समीकरणों का संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब और जॉर्डन के एयरस्पेस का उपयोग करना इस बात का भी संकेत है कि भारत के खाड़ी देशों के साथ रिश्ते कितने मजबूत हुए हैं। 6 से 7 घंटे की यह उड़ान न केवल दिल्ली और तेल अवीव के बीच की दूरी कम कर रही है, बल्कि एक नए 'वर्ल्ड ऑर्डर' की नींव भी रख रही है।

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