मोदी-मर्ज की 'अहमदाबाद डिप्लोमेसी', साबरमती किनारे पतंगबाजी और 5 बिलियन यूरो की डील पर महामंथन

Modi-Merz Meet: जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज पहली एशिया यात्रा पर अहमदाबाद पहुंचे हैं। मर्ज ने पीएम मोदी संग पतंगबाजी और साबरमती आश्रम दौरे के साथ रणनीतिक, रक्षा और व्यापारिक सहयोग पर चर्चा शुरू की है।
PM Narendra Modi German Chancellor Friedrich Merz
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और पीएम मोदी, फोटो- सोशल मीडिया
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German Chancellor Friedrich Merz Gujrat Visit: भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक साझेदारी का एक नया अध्याय आज गुजरात की ऐतिहासिक धरती पर लिखा जा रहा है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अहमदाबाद पहुँचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जिसमें रक्षा और व्यापार मुख्य केंद्र हैं।

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज सोमवार को अपनी पहली आधिकारिक एशिया यात्रा के तहत गुजरात के अहमदाबाद पहुंचे। एयरपोर्ट पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद, चांसलर सीधे ऐतिहासिक साबरमती आश्रम पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी अगवानी की। दोनों नेताओं ने साबरमती आश्रम की पुनर्विकास परियोजना की समीक्षा की और महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

एक ही कार में सवार होकर पहुंचे साबरमती रिवरफ्रंट

आश्रम के दौरे के बाद, पीएम मोदी और चांसलर मर्ज एक ही कार में सवार होकर साबरमती रिवरफ्रंट पहुंचे। यहाँ उन्होंने 'अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026' का उद्घाटन किया और आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगों के बीच सांस्कृतिक कूटनीति का परिचय दिया। साबरमती के तट पर चरखा चलाना और पतंग उत्सव में शामिल होना, भारत की सॉफ्ट पावर और जर्मनी के साथ बढ़ती नजदीकी का एक बड़ा संदेश है।

5 बिलियन यूरो का पनडुब्बी सौदा: रक्षा क्षेत्र में बड़ी छलांग

इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक हिस्सा रक्षा सहयोग है। सूत्रों और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस दौरे के दौरान 5 बिलियन यूरो (लगभग 45,000 करोड़ रुपये से अधिक) के पनडुब्बी सौदे पर अंतिम मुहर लग सकती है। यह परियोजना भारतीय नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा देगी। इस सौदे के तहत जर्मन कंपनी थिसेनक्रुप (ThyssenKrupp) और भारत के मझगांव डॉक (Mazagon Dock) के बीच छह अत्याधुनिक स्टील्थ पनडुब्बियों की आपूर्ति को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है। इसे 'मेक इन इंडिया' अभियान की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। जर्मनी द्वारा भारत को इस स्तर की सैन्य तकनीक हस्तांतरित करना दोनों देशों के बीच गहरे भरोसे को दर्शाता है।

आर्थिक संबंध: अमेरिकी टैरिफ और यूरोप की ओर बढ़ता भारत

चांसलर मर्ज की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। हाल ही में अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के संकेतों के बीच, भारत अब यूरोप और विशेष रूप से जर्मनी के साथ अपने आर्थिक संबंधों को और अधिक विविधता देना चाहता है। जर्मनी वर्तमान में यूरोपीय संघ (EU) में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 51.23 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। चांसलर की इस यात्रा के बाद जल्द ही भारत और यूरोपीय संघ के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी प्रगति की संभावना है।

ग्रीन हाइड्रोजन और वैश्विक चुनौतियां

व्यापार और रक्षा के अलावा, दोनों नेता भविष्य की ऊर्जा यानी 'ग्रीन हाइड्रोजन' पर भी हाथ मिला रहे हैं। भारत और जर्मनी 'इंडो-जर्मन ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप' पर तेजी से काम कर रहे हैं, जो भविष्य में कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

पीएम मोदी और चांसलर मर्ज के बीच यूक्रेन संकट, शांति बहाली और वेनेजुएला जैसे वैश्विक तनावों पर भी गहन चर्चा होने की उम्मीद है। अहमदाबाद के बाद चांसलर मर्ज का अगला पड़ाव बेंगलुरु होगा, जहाँ वे भारत की तकनीकी और कौशल विकास क्षमताओं का जायजा लेंगे। यह यात्रा भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के 25 साल और राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित की गई है, जो दोनों देशों के सुनहरे भविष्य की नींव रख रही है।

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