दिल्ली ब्लास्ट के बाद भी पीएम मोदी का भूटान दौरा: क्या यही बनेगा चीन के ब्रह्मपुत्र प्लान का तोड़?

PM Modi Bhutan: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भूटान दौरा सिर्फ मैत्रीपूर्ण यात्रा नहीं बल्कि चीन के ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाने की योजना के खिलाफ एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
Reason Of PM Modi Bhutan Visit
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (सोर्स - X)
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Reason Of PM Modi Bhutan Visit: दिल्ली में ब्लास्ट की घटना के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूटान दौरे पर गए हैं। यह यात्रा भारत-भूटान संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ चीन के बढ़ते कदमों पर रोक लगाने की दिशा में अहम मानी जा रही है। चीन ने हाल ही में ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा बांध बनाने का ऐलान किया है, जिससे भारत की चिंता बढ़ गई है। ऐसे में मोदी का यह दौरा रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्यों अहम है पीएम मोदी का भूटान दौरा

प्रधानमंत्री मोदी का भूटान दौरा अचानक नहीं, बल्कि गहरी रणनीतिक सोच का हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के बांध निर्माण की योजना का जवाब भूटान के सहयोग से ही संभव है। भूटान भारत का भरोसेमंद साझेदार है और वह चीन की जल नीति में बड़ा अवरोध बन सकता है। भारत और भूटान के बीच पहले से ही कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जो दोनों देशों को और करीब लाते हैं।

हाइड्रोलॉजिकल डाटा में भूटान का अहम योगदान

चीन ने तिब्बत के मेदोग क्षेत्र में 60 हजार मेगावाट के बांध प्रोजेक्ट की घोषणा की है। भूटान और भारत दोनों ब्रह्मपुत्र नदी के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम हिस्सों से जुड़े हैं। भूटान मानस और संकोश नदियों का रियल टाइम वाटर फ्लो डाटा भारत को देता है, जिससे भारत को पहले से चेतावनी मिल जाती है। जहाँ चीन ने 2022 से डाटा शेयरिंग बंद कर दी है, वहीं भूटान अब इस कमी को पूरा कर सकता है।

भूटान से आता है ब्रह्मपुत्र का ज्यादा पानी

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार, ब्रह्मपुत्र का 65-70% पानी भूटान और अरुणाचल प्रदेश से आता है। चीन से केवल 25-30% पानी बहता है, जिससे भारत और भूटान मिलकर चीन पर दबाव बना सकते हैं। अगर नेपाल और बांग्लादेश भी भारत-भूटान के साथ शामिल हो जाएं, तो “ब्रह्मपुत्र रिवर कमीशन” बनाकर चीन की मनमानी पर लगाम लगाई जा सकती है।

भूटान में बांध बनाकर चीन को काउंटर करने की तैयारी

भारत पहले ही अरुणाचल में बांध बना रहा है, ताकि चीन की योजना का मुकाबला किया जा सके। अगर भारत भूटान की मदद से वहां भी बड़े बांध बनाए, तो चीन का पानी रोकने या नुकसान पहुंचाने का प्लान कमजोर हो जाएगा।

बॉर्डर पर भी मजबूत साझेदारी

डोकलाम विवाद के दौरान भूटान भारत के साथ मजबूती से खड़ा था। अब भारत ने भूटान में चीन सीमा के पास सड़क निर्माण कर अपनी स्थिति और मजबूत की है। भूटान न सिर्फ जमीन पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत का समर्थन करता है। पर्यावरण संरक्षण में विश्वास रखने वाला भूटान, चीन के बांध निर्माण को एक बड़ा खतरा मानता है। पीएम मोदी का भूटान दौरा सिर्फ दोस्ती नहीं, बल्कि एक स्मार्ट मूव है।

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