महिला आरक्षण बिल पर मचा घमासान...BJP सरकार के पास नहीं है संख्या बल, विपक्ष को कैसे मनाएंगे मोदी?

Constitution Amendment Bill: महिला आरक्षण और लोकसभा की 850 सीटों पर विस्तार के प्रस्ताव से विवाद। विपक्ष ने 2011 जनगणना और दक्षिण भारत के राज्यों को होने वाले नुकसान पर जताई कड़ी आपत्ति।
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राहुल गांधी, PM मोदी (Image- Social Media)
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Delimitation Commission: करीब 13 दिनों के अंतराल के बाद आज से संसद का सत्र दोबारा शुरू हो रहा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस विशेष सत्र का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए प्रस्तावित आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करना और इसके लिए सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े तीन विधेयकों को पारित कराना है। हालांकि, विपक्ष ने इन तीनों बिलों का विरोध करने का निर्णय लिया है। उसका आरोप है कि महिला आरक्षण के बहाने सरकार परिसीमन के जरिए सीटें बढ़ाने की योजना बना रही है।

850 सीटों के प्रावधान पर विवाद

महिला आरक्षण संशोधन बिल को लेकर विपक्ष की सबसे बड़ी आपत्ति दो मुद्दों पर है। पहला, संविधान संशोधन के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 850 तक बढ़ाने का प्रस्ताव। दूसरा, सीटों के इस विस्तार और परिसीमन के लिए किसी स्पष्ट फॉर्मूले का उल्लेख न होना। परिसीमन से जुड़े विधेयक के सेक्शन 8 में केवल इतना कहा गया है कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन आयोग सीटों का पुनर्वितरण करेगा और उनके क्षेत्र तय करेगा, लेकिन सीटें किस आधार पर बढ़ाई जाएंगी, यह स्पष्ट नहीं किया गया है।

2011 की जनगणना पर उठे सवाल

इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष विरोध में उतर आया है। उसका कहना है कि यदि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का बंटवारा किया गया, तो दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक को नुकसान हो सकता है। इन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है और उनकी जनसंख्या वृद्धि दर अपेक्षाकृत कम रही है।

संविधान संशोधन बिल पर चुनौती

विपक्ष के विरोध के चलते सीटों की संख्या बढ़ाने वाले संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। नियमों के अनुसार, ऐसे किसी भी संशोधन को पारित करने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है, जबकि मोदी सरकार के पास फिलहाल इतना संख्या बल नहीं है।

सरकार दे सकती है आश्वासन

सूत्रों के मुताबिक, सरकार विपक्ष को मनाने के लिए बहस के दौरान कुछ अहम आश्वासन दे सकती है या विधेयकों में बदलाव कर सकती है। उदाहरण के तौर पर, यह स्पष्ट किया जा सकता है कि 2011 की जनगणना का उपयोग केवल सीटों की सीमा और क्षेत्र निर्धारण के लिए होगा, न कि उनकी संख्या बढ़ाने के लिए।

आनुपातिक वृद्धि का विकल्प

सरकार एक और प्रस्ताव रख सकती है कि सभी राज्यों में सीटों की संख्या समान रूप से, जैसे लगभग 50 प्रतिशत तक, बढ़ाई जाए। इससे सीटों के विस्तार में जनसंख्या के आधार की भूमिका कम हो जाएगी और सभी राज्यों में संतुलित वृद्धि संभव हो सकेगी। पहले भी ऐसी खबरें सामने आई थीं कि सरकार पहले सभी राज्यों में सीटें बढ़ाकर बाद में परिसीमन के जरिए उनके क्षेत्र निर्धारित करेगी।

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