लोकसभा में भिड़े अखिलेश और अमित शाह, सपा ने मांगा मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण तो शाह ने दिया जवाब- VIDEO

Akhilesh Yadav: अमित शाह का संसद में बड़ा बयान जनगणना जाति आधारित होगी। अखिलेश यादव के आरोपों को नकारा और कहा- धर्म के आधार पर आरक्षण असंवैधानिक है। सपा की OBC आरक्षण की मांग पर तीखा पलटवार।
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अखिलेश और अमित शाह(Image- Social Media)
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Parliament Session: संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों पर चर्चा के दौरान 'जाति जनगणना' (Caste Census) को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समाजवादी पार्टी (सपा) के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सरकार की स्थिति स्पष्ट की।

संसद में अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार जनगणना के साथ जाति आधारित गणना भी कराएगी।उन्होंने कहा कि जनगणना की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और जाति जनगणना को भी औपचारिक मंजूरी दी जा चुकी है। उनके अनुसार, आगामी जनगणना में व्यक्तियों की गिनती के साथ-साथ जाति का कॉलम भी शामिल होगा।

धर्म के आधार पर आरक्षण देना असंवैधानिक

अमित शाह ने सदन में कहा कि “जब जनगणना होगी, वह जाति आधारित जनगणना के साथ ही होगी।” उन्होंने यह भी दोहराया कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना असंवैधानिक है और इस पर सरकार का रुख स्पष्ट है। धर्मेंद्र यादव द्वारा दिए गए बयान को भी उन्होंने संविधान के खिलाफ बताया।

जाति जनगणना कराई जाएगी

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि सरकार महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक को इसलिए आगे बढ़ा रही है ताकि भविष्य में आने वाली जाति जनगणना के आधार पर आरक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो। इन आरोपों को खारिज करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सरकार पूरी तरह पारदर्शी है और जाति जनगणना कराई जाएगी, इसलिए इस मुद्दे पर किसी भी तरह का भ्रम फैलाने की जरूरत नहीं है।

SP का बस चले तो घरों की जाति तय कर दे

लोकसभा में तीनों बिलों के प्रस्ताव के बाद विपक्ष का विरोध जारी है। इसी बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सपा का बस चले तो घरों की भी जाति तय कर दे। वहीं, सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी मांग उठाई थी कि ओबीसी और मुसलमान महिलाओं को आरक्षण में शामिल कर लेना चाहिए।

इससे पहले सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने लोकसभा में पेश किए गए तीनों विधेयकों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि ये विधेयक संविधान को तोड़ने‑मरोड़ने की कोशिश हैं और इनका उद्देश्य लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करना है।

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