ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी भारत को वापस लौटाएगी 500 साल पुरानी कांस्य मूर्ति, तमिलनाडु से हुई थी चोरी

विदेशों के म्यूजियम जिन कलाकृतियों और मूर्तियों से सजाए गए हैं, उनमें से ज्यादातर भारत जैसे देशों से चुराई गई थी। अब बहुत सी मूर्तियां भारत को वापस लौटाई जाए रहीं हैं। इसी कड़ी में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी 500 साल पुरानी कांस्य मूर्ति भारत को लौटाएगी।
Saint Thirumangai Alwar 16th century statue
संत थिरुमंगई अलवर की 16वीं सदी की मूर्ति (सौजन्य- सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

लंदन: देश से चुराई गई भारतीय कलाकृतियों के वापस लौटने के कई उदाहरण है। इसी कड़ी में अब ब्रिटेन के प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने एक संत की 500 साल पुरानी कांस्य मूर्ति भारत को लौटाने पर सहमति जताई है। यह माना जाता है कि यह मूर्ति तमिलनाडु के एक मंदिर से चुराई गई थी।

विश्वविद्यालय के एशमोलियन संग्रहालय की ओर से जारी किए गए एक बयान में कहा गया है कि, ‘‘11 मार्च 2024 को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की परिषद ने एशमोलियन संग्रहालय से संत तिरुमंगाई अलवर की 16वीं शताब्दी की कांस्य मूर्ति की वापसी के लिए भारतीय उच्चायोग के दावे का समर्थन किया। अब आखिरी निर्णय के लिए यह चैरिटी आयोग को प्रस्तुत किया जाएगा।"

नीलामी से म्यूजियम पहुंची मूर्ति

संत तिरुमंगाई अलवर की 60 सेंटीमीटर ऊंची प्रतिमा को 1967 में डॉ. जे.आर. बेलमोंट (1886-1981) नामक एक संग्रहकर्ता के संग्रह से ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के एशमोलियन संग्रहालय द्वारा प्राप्त किया गया था। यह मूर्ति सोथबी की नीलामी से प्राप्त की गई थी। संग्रहालय का कहना है कि पिछले वर्ष नवम्बर में एक स्वतंत्र शोधकर्ता ने उसे इस प्राचीन मूर्ति की उत्पत्ति के बारे में जानकारी दी थी, जिसके बाद उन्होंने भारतीय उच्चायोग को इस मूर्ति के बारे में सूचित किया था। भारत सरकार ने इस कांस्य मूर्ति के लिए औपचारिक रूप से विश्वविद्यालय से अनुरोध किया। यह माना जाता है कि यह मूर्ति तमिलनाडु के एक मंदिर से चुराई गई थी और नीलामी के जरिए ब्रिटेन के एक संग्रहालय तक पहुंची। विश्व की कुछ सर्वाधिक प्रसिद्ध कला और पुरातत्व कलाकृतियां रखने वाले इस संग्रहालय का कहना है कि 1967 में उसने इस मूर्ति को हासिल किया था।

भारतीय कलाकृतियों की घर वापसी

चुराई गई भारतीय कलाकृतियों को ब्रिटेन द्वारा भारत को लौटाए जाने के कई उदाहरण हैं। यूनाइटेड किंगडम ने भारत से चुराई गई कलाकृतियों वापस की हैं। अभी पिछले साल अगस्त में आंध्र प्रदेश से लायी गयी चूना पत्थर पर तराशी गई मूर्ति और 17वीं सदी की तमिलनाडु की “नवनीत कृष्ण” कांस्य मूर्ति को जांच के बाद ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त को सौंप दिया गया था। संत तिरुमंगई दक्षिण भारत के 12 अलवर संतों में आखिरी संत थे। वो हिंदू धर्म की वैष्णव परंपरा से जुड़े हुए थे। थिरुमंगई अलवर को सभी अलवरों में से सबसे विद्वान माना जाता है।

(एजेंसी-इनपुट के साथ)

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com