ओडिशा में बड़ी गड़बड़ी! SIR से पहले ही वोटर लिस्ट से गायब हुए 9.8 लाख नाम, चुनाव आयोग ने दिए जांच के निर्देश
Odisha Voter List: ओडिशा में 9.8 लाख नाम वोटर लिस्ट से गलत तरीके से हटाए जाने की शिकायतों पर चुनाव आयोग सख्त। CEO ने मई में शुरू होने वाले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन से पहले वैरिफिकेशन के निर्देश दिए हैं।
- Written By: अर्पित शुक्ला
सांकेतिक तस्वीर (Image- Social Media)
Odisha Voter List Names Deleted: ओडिशा में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया मई से शुरू होने की संभावना है। इसी बीच राज्य में मतदाता सूची से करीब 9.8 लाख नाम गलत तरीके से हटाए जाने को लेकर शिकायतें सामने आई हैं, जिसके बाद चुनाव आयोग ने सख्ती दिखाई है। चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO) ने फाइनल वोटर लिस्ट तैयार करने से पहले कड़े सत्यापन (verification) के निर्देश जारी किए हैं।
CEO कार्यालय के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि नाम हटाने को लेकर बड़ी संख्या में शिकायतें मिली हैं। इनमें ऐसे मामले भी शामिल हैं जहां संबंधित वोटर जीवित पाए गए, जबकि उनके नाम सूची से हटा दिए गए थे। साथ ही कई मामलों में आरोप है कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने नाम हटाने से पहले न तो फील्ड विजिट किया और न ही उचित सत्यापन प्रक्रिया अपनाई।
इलेक्टोरल मैपिंग की प्रक्रिया पूरी
जनवरी से मार्च के बीच ओडिशा में इलेक्टोरल मैपिंग की प्रक्रिया पूरी की गई थी। इसके बाद 2 अप्रैल के बाद करीब दो लाख फॉर्म-7 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें नाम जोड़ने या हटाने को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। इन आवेदनों को फिलहाल रोक दिया गया है। इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) से यह प्रमाण देने को कहा गया है कि कम से कम 50 प्रतिशत मामलों का भौतिक सत्यापन किया गया है और नाम हटाने की प्रक्रिया सभी नियमों के अनुसार हुई है।
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अंतिम पते पर नोटिस भेजना अनिवार्य
आमतौर पर राज्य में हर साल अलग-अलग कारणों से लगभग 7 से 9 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाते हैं, लेकिन इस बार SIR से पहले चल रही मैपिंग प्रक्रिया के कारण यह संख्या बढ़ी है। CEO आर.एस. गोपालन ने बताया कि BLOs को मैपिंग के दौरान ऐसे नाम मिले हैं जो मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट थे, लेकिन उन्हें सीधे हटाने का अधिकार नहीं है। इसके लिए परिवार या पड़ोसियों से फॉर्म-7 पर पुष्टि जरूरी है।
एडिशनल CEO द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि मृत्यु के मामलों में भी नाम हटाने से पहले अंतिम पते पर नोटिस भेजना अनिवार्य होगा। वहीं, संदिग्ध डुप्लीकेट या मिलान वाले मामलों में वोटरों को नोटिस देकर पूरी प्रक्रिया का पालन करना होगा। शिकायतों की जांच ईमेल, 1950 कॉल सेंटर, NGRS और अन्य माध्यमों से भी की जाएगी।
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अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में गलत तरीके से नाम हटाए गए हैं, वहां वोटरों को प्राथमिकता के आधार पर दोबारा सूची में शामिल किया जाएगा। पहले SIR प्रक्रिया 1 अप्रैल से शुरू होनी थी, लेकिन कुछ राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। अब इसके मई में शुरू होने की संभावना है।
