Explainer: OMR शीट से ही क्यों होता है NEET एग्जाम? जानिए NTA के लिए कितना मुश्किल है पेपर लीक रोकना

NTA Exam Security: नीट 2026 पेपर लीक मामले ने NTA की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानिए क्यों तकनीक के बावजूद पेपर लीक हुआ और क्यों यह परीक्षा अब भी पेन-पेपर मोड में होती है।
NEET Paper Leak 2026
नीट परीक्षा 2026 रद्द (AI जनरेटेड फोटो)
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NEET Paper Leak 2026: राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने हाल ही में मेडिकल कोर्स में प्रवेश परीक्षा के लिए आयोजित होने वाली नेशनल एबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) परीक्षा को पेपर लीक की खबरें सामने आने बाद रद्द कर दिया। पेपर लीक मामले की जांच का जिम्मा केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया गया है। NTA ने परीक्षा रद्द किए जाने को लेकर कहा, एजेंसी जल्द ही सरकार की सलाह पर दोबारा परीक्षाओं का आयोजन करवाएगी। 

नीट परीक्षा में पेपर लीक का यह मामला नया नहीं है। इससे पहले 2024 में भी झारखंड में नीट पेपर लीक का मामला सामने आया था। 2026 में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने नीट परीक्षा से पहले ये दावा किया था कि उन्होंने लीक से बचने के लिए सुरक्षा का एक बड़ा चक्रव्यूह बनाया है जिसे भेद पाना नामुमकिन है। लेकिन एजेंसी की लाख कोशिशों के बाद भी पेपर लीक हो गया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या NTA नीट परीक्षा आयोजित करने के योग्य नहीं है? नीट परीक्षा आयोजन कितना मुश्किल है? और भारत में जब अधिकत्तर परिक्षाएं ऑनलाइन मोड में करवाई जाती हैं तो फिर नीट परीक्षा क्यों आज भी पेन और पेपर से करवाई जाती है?

क्या NTA नीट परीक्षा आयोजित करने के योग्य नहीं है?

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) का गठन 2017 में भारत के शिक्षा मंत्रालय द्वारा किया गया था। इसका उद्देश्य देशभर में आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षाओं जैसे इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट, और फेलोशिप को सुचारू रूप से करवाना था। NTA ने इन 9 वर्षों में कई परीक्षाओं का सफलतापूर्वक आयोजन भी करवाया है। लेकिन इस दौरान संस्थान को कई बार पेपर लीक जैसी घटनाओं का सामना भी करना पड़ा है।

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देशभर में कई परीक्षाएं आयोजित करवाती है NTA (सोर्स- सोशल मीडिया)

ये बात सच है कि NTA सरकारी संस्था है लेकिन वो खुद परीक्षा केंद्रों का निर्माण नहीं करवाती। बल्कि वो इनके लिए टेंडर निकालती है और प्राइवेट कंपनियों को इसका जिम्मा दे देती है। NTA परीक्षाओं के लिए प्रश्न पत्र तैयार करती है, नियम बनाती है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश करती है परीक्षाएं बिना किसी गड़बड़ी के आयोजित हो। लेकिन जमीनी स्तर पर ये जिम्मा उन प्राइवेट कंपनियों पर ही होता है जिन्हें परीक्षा करवाने का टेंडर मिला होता है।

भारत में नीट परीक्षा करवाना कितना मुश्किल है?

भारत जैसे विशाल देश में नीट का आयोजन करना एक बहुत बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती है, जिसके मुख्य कारण इसमें शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या है। 2026 में लगभग 22.8 लाख छात्रों ने नीट यूजी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। इतने अधिक लोगों के लिए एक साथ एक ही समय पर परीक्षा आयोजित करना दुनिया के सबसे बड़े अभियानों में से एक है।

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2026 में 22.8 लाख छात्रों ने दिया था नीट एग्जाम (सोर्स- सोशल मीडिया)

इसके अलावा यह परीक्षा भारत के 550 से अधिक शहरों और विदेशों में भी कई केंद्रों पर एक साथ होती है। दूरदराज के इलाकों तक पेपर सुरक्षित पहुंचाना और वहां बिजली इंटरनेट जैसी सुविधाओं का प्रबंधन करना भी एक काम मुश्किल होता है। साथ ही देशभर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए केवल यही एक रास्ता है, इसलिए इस पर दबाव बहुत अधिक रहता है।

NTA ने लीक से बचाने के लिए क्या उपाय किए थे?

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने इस साल सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का भारी सहारा लिया था:

5G जैमर्स: परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल ब्लूटूथ या वाई-फाई सिग्नल रोकने के लिए हाई फ्रीक्वेंसी जैमर्स लगाए गए थे।

AI निगरानी: सीसीटीवी कैमरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ा गया था जो छात्रों की संदिग्ध हरकतों जैसे बार बार मुड़ना या इशारे करना पर मुख्यालय को तुरंत अलर्ट भेजते थे।

GPS और डिजिटल लॉक: पेपर ले जाने वाले बॉक्स में GPS ट्रैकर लगे थे और उनमें डिजिटल लॉक थे जो केवल परीक्षा के समय ही ऑथोराइज्ड सेंटर पर खुल सकते थे।

बायोमेट्रिक और चेहरा पहचान: फर्जी छात्रों (किसी और के प्रवेश पत्र पर परीक्षा देने वाले)  को रोकने के लिए रजिस्ट्रेशन के समय ली गई फोटो का मिलान परीक्षा हॉल में बायोमेट्रिक डेटा से किया गया था।

कड़ी सुरक्षा के बाद पेपर लीक कैसे हुआ?

तमाम सुरक्षा उपायों के बावजूद जांच एजेंसियों CBI और राजस्थान SOG की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार लीक के पीछे सिस्टम की कुछ कमजोर कड़ियां और एक बड़ा नेटवर्क शामिल था। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि महाराष्ट्र के नासिक में एक शैडो सर्वर का इस्तेमाल डेटा ट्रांसफर के लिए किया गया। आशंका है कि एक निजी कूरियर कंपनी के कर्मचारी ने पेपर ले जाने वाले बॉक्स तक पहुंच बनाने में मदद की।

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पेपर लीक के बाद रद्द हुई परीक्षा (AI जनरेटेड फोटो)

सीबीआई ने दावा किया कि, अपराधियों ने असली पेपर को सीधे लीक पेपर कहने के बजाय गेस पेपर के नाम से बेचा। यह पेपर परीक्षा से हफ्तों पहले से ही व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर फैल गया था। इसके अलावा राजस्थान के सीकर और जयपुर के कुछ कोचिंग संस्थानों और हॉस्टल मालिकों की भूमिका भी सामने आई है। सीकर के एक हॉस्टल मालिक के पास यह पेपर परीक्षा की रात 11 बजे पहुंच गया था। लीक पेपर के लिए छात्रों और अभिभावकों से 7 से 15 लाख रुपये तक वसूले गए। यह साफ है कि जहां टेक्नोलॉजी मजबूत थी वहां मानवीय हस्तक्षेप और लॉजिस्टिक चेन में सेंधमारी ने पूरे सिस्टम को फेल कर दिया।

पेन और पेपर से क्यों करवाई जाती है नीट परीक्षा?

नीट जैसी बड़ी परीक्षा को पेन-पेपर यानी OMR शीट मोड में आयोजित करवाने को लेकर दो तरह के तर्क हैं। जिसमें कुछ इसे सही मानते हैं तो कुछ इसे पुरानाऔर लंबा प्रोसेस मानते हैं और इसे बदलने की वकालत करते हैं। इसे तर्क के पीछे सुरक्षा और पेपर लीक को सबसे बड़ी चुनौती माना जाता है।

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OMR शीट मोड से कराई जाती है नीट परीक्षा (सोर्स- सोशल मीडिया)

पेन और पेपर मोड में सबसे बड़ी समस्या लॉजिस्टिक्स की है। पेपर छपने से लेकर ट्रकों में ट्रांसपोर्ट होने और फिर देशभर के हजारों केंद्रों के स्ट्रांग रूम तक पहुंचने के बीच कई ह्यूमन टचपॉइंट्स होते हैं। हर स्टेज पर पेपर लीक होने का खतरा बना रहता है। जबकि, ऑनलाइन परीक्षा CBT में पेपर एन्क्रिप्टेड होता है और परीक्षा शुरू होने से कुछ मिनट पहले ही सर्वर पर खुलता है जिससे फिजिकल लीक की गुंजाइश खत्म हो जाती है। 

इसके अलावा ऐसी चिंताएं अक्सर सामने आती हैं कि परीक्षा के बाद खाली छोड़ी गई OMR शीट में छेड़छाड़ की जा सकती है। हालांकि अब इसमें काफी कड़ाई बरती जाती है, लेकिन यह जोखिम बना रहता है। साथ ही लाखों छात्रों की फिजिकल कॉपियों को इकट्ठा करना उन्हें स्कैन करना और फिर डेटा प्रोसेस करने में काफी समय लगता है। डिजिटल तरीके से रिजल्ट बहुत तेजी से और अधिक सटीकता के साथ तैयार किया जा सकता है।

इतनी परेशानियों के बाद भी OMR शीट मोड को प्राथमिकता क्यों?

भारत के ग्रामीण इलाकों में आज भी हर छात्र कंप्यूटर चलाने में सहज नहीं है। ऐसे में पेन और पेपर सबको समान अवसर प्रदान करता है। साथ ही एक ही दिन में 25 लाख से ज्यादा छात्रों के लिए कंप्यूटर लैब और हाई स्पीड इंटरनेट का इंतजाम करना फिलहाल एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती है।

इसके अलावा तकनीकी खराबी भी एक बड़ी समस्या बन सकती है। ऑनलाइन परीक्षा में सर्वर डाउन होना या बिजली कटने जैसी समस्याओं से पूरी परीक्षा रुकावट पैदा हो सकती है। जो इतने बड़े स्तर की परीक्षा में अफरातफरी की स्थिति खड़ी कर सकती है। इसमें कोई शक नहीं है अब पेन और पेपर मोड पुरानी तकनीक बन चुका है और पेपर लीक की घटनाओं ने इसपर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लेकिन वहीं, दूसरी तरफ ये ग्रामीण इलाकों में होने वाली परीक्षाओं जहां बिजली सुविधाएं दिल्ली, मुंबई या दूसरे बड़े शहरों की तरह नहीं है। उस लिहाज से पेन और पेपर मोड अभी भी प्रासंगिक बनी हुई है। 

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