लव जिहाद कानून पर मोदी-योगी की जीत! मुस्लिम मंच ने अनैतिक धर्मांतरण को बताया गलत, सुप्रीम कोर्ट ने..

Love Jihad Law: अखिल भारतीय पसमांदा मुस्लिम मंच ने इन कानूनों के समर्थन में याचिका दायर की है। याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य याचिकाओं के साथ सुनने का आश्वासन दिया है। कोर्ट मामले में सुनवाई करेगा।
Modi-Yogi win on Love Jihad law! Muslim Forum condemns unethical conversions
सुप्रीम कोर्ट, पीएम मोदी और सीएम योगी।
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Delhi News: उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में लव जिहाद और अनैतिक धर्मांतरण को रोकने वाले कानून बने हैं। इन कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इस बीच अखिल भारतीय पसमांदा मुस्लिम मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष जावेद मलिक ने इन कानूनों के समर्थन में याचिका दाखिल की है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में उनकी याचिका पर सुनवाई टल गई है। सुप्रीम कोर्ट 28 जनवरी को सुनवाई करेगा। बता दें साल 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद भाजपा शासित राज्यों ने लव जिहाद के खिलाफ कानून बनाए हैं।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वे जनवरी के तीसरे हफ्ते में मामले की फाइनल हियरिंग के लिए लिस्ट करेंगे। साथ ही सभी राज्यों से कहा कि वे तीन हफ्तों में अपना जवाब दाखिल करें। जावेद मलिक की याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट ने आश्वासन दिया कि इसे बाकी याचिकाओं के साथ सुना जाएगा। जावेद ने याचिका में कहा है कि वह इन राज्यों के कानूनों का समर्थन करते हैं। वह चाहते हैं कि उन याचिकाओं को खारिज किया जाए, जो इन कानूनों को चुनौती दे रहीं। उनका कहना है कि ये कानून समाज में शांति कायम रखने और जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए जरूरी हैं।

जोड़ों को परेशान करने का जरिया

इन राज्यों द्वारा बनाए कानूनों के खिलाफ याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये कानून अंतर धार्मिक जोड़ों को परेशान करने और व्यक्तिगत फैसलों में हस्तक्षेप का जरिया बन गए हैं। उनका आरोप है कि इन कानूनों की आड़ में कोई व्यक्ति बिना वजह धर्मांतरण के आरोप में फंस सकता है। इस तरह के मामलों में अक्सर लोगों की निजी जिंदगी में दखल दिया जाता और सामाजिक तनाव बढ़ता है।

कानून के गलत इस्तेमाल की आशंका

इन याचिकाओं को जमीयत उलेमा-ए-हिंद और सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस जैसे संगठन भी दाखिल किए हैं। इन संगठनों ने कहा है कि कानून का गलत इस्तेमाल होने की आशंका बनी हुई है। इससे धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट अब मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला देगा। जावेद की याचिका और बाकी याचिकाओं की सुनवाई के बीच कोर्ट तय करेगा कि कानून संविधान के दायरे में है या नहीं।

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