पेरिस की सड़कों से साफ हो गए थे कुत्ते लेकिन.., मेनका गांधी ने क्यों याद दिलाया 45 साल पुराना इतिहास

Maneka Gandhi on Stray Dogs: पूर्व बीजेपी सांसद व एनिमल वेलफेयर एक्टीविस्ट मेनका गांधी ने दिल्ली से आवारा कुत्तों के हटाए जाने का विरोध किया। इस दौरान उन्होंने 1980 में पेरिस में हुई घटना की याद दिलाई
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कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन फोटो)
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Maneka Gandhi: दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, सड़क अधिकार कार्यकर्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने इस फैसले की खुलकर आलोचना की है। वह इसे गुस्से में लिया गया फैसला बता रही हैं और दावा कर रही हैं कि इस फैसले को लागू करना संभव नहीं है क्योंकि दिल्ली सरकार के पास कुत्तों को रखने के लिए शेल्टर होम नहीं हैं।

मेनका गांधी ने कहा, 48 घंटे के अंदर गाजियाबाद और फरीदाबाद से तीन लाख कुत्ते आ जाएंगे क्योंकि दिल्ली में खाना है। और जैसे ही आप कुत्तों को हटाएंगे, बंदर आ जाएंगे। मैंने अपने घर में भी ऐसा होते देखा है। इस दौरान मेनका गांधी ने पेरिस के उस दौर की याद दिलाई जब सड़कों से कुत्तों और बिल्लियों को हटाया गया था।

मेनका ने याद दिलाई पेरिस की घटना

उन्होंने कहा, 1880 के दशक में पेरिस में जब कुत्तों और बिल्लियों को हटाया गया था, तो शहर चूहों से भर गया था। उन्होंने यह भी बताया कि कुत्ते और बिल्लियां रोडेंट कंट्रोल एनिमल के तौर पर काम करते है। इनकी अनुपस्थिति पारिस्थितिकीय असंतुलन पैदा कर सकती है।

और क्या कुछ बोलीं मेनका गांधी?

मेनका गांधी ने कहा कि व्यापक विचार-विमर्श के बाद, सरकार नसबंदी, एंटी-रेबीज और डिस्टेंपर टीकाकरण, स्थानांतरण पर प्रतिबंध के सख्त कार्यान्वयन के माध्यम से कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने और कुत्तों के काटने की घटनाओं को कम करने के लिए एक रोडमैप पर पहले ही सहमत हो चुकी है। अगर हम कुत्तों को दूसरी जगहों पर ले जाना बंद कर दें, तो काटने की घटनाओं में भी कमी आएगी।

1980 में पेरिस में क्या हुआ था?

वर्ष 1880 में पेरिस में एक अजीबोगरीब संकट आया था। यहां कुत्तों और बिल्लियों की संख्या बढ़ गई थी और शहर में गंदगी भी फैल रही थी। इसके अलावा, कुत्तों के काटने से रेबीज के रोगियों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई थी। इस दौरान कई लोगों को उचित उपचार नहीं मिल पाया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। स्थिति बिगड़ती देख, सफाई और सुधार के प्रयास के तहत पेरिस की सड़कों से इन कुत्तों और बिल्लियों को हटाने के आदेश दिए गए।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान बड़े पैमाने पर कुत्तों और बिल्लियों को मारा गया। लेकिन कुत्तों और बिल्लियों को हटाने के बाद स्थिति और बिगड़ गई। माना जाता है कि इस कदम का असर यह हुआ कि शहर में चूहों की संख्या तेज़ी से बढ़ी। चूहों ने लोगों के घरों से लेकर नालियों और सड़कों तक आतंक फैलाना शुरू कर दिया।

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