अंतरिक्ष से आया बड़ा अपडेट, फेल नहीं हुआ ISRO का PSLV मिशन! KID अब भी भेज रहा Data
ISRO Mission PSLV Fail: KID टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर और कंपनी के प्रस्तावित वाहन कर्नेल का प्रोटोटाइप था। इसका मकसद कक्षा से पृथ्वी पर 120 किलो तक का पेलोड वापस लाना है। इसने अंतरिक्ष से डेटा भेजा है।
- Written By: रंजन कुमार
इसरो का सैटेलाइट। इमेज-सोशल मीडिया
ISRO Mission: कभी-कभी काम पूरा करने को बच्चों की तरह पूरी लगन की जरूरत होती है। सोमवार को असफल हुए PSLV-C62 मिशन के यात्रियों में से एक KID ने ठीक यही बताया। जब माना जा रहा था कि मिशन के बाद PSLV का पूरा पेलोड खो गया है, तब मंगलवार को स्पेनिश स्टार्टअप ऑर्बिटल पैराडाइम ने बताया कि उसका केस्ट्रेल इनिशियल डेमोंस्ट्रेटर (KID) कैप्सूल न सिर्फ स्पेसक्राफ्ट से अलग हो चुका है, बल्कि डेटा भी भेज रहा है।
KID की इस उपलब्धि को कंपनी ने बखूबी समझा। ऑर्बिटल पैराडाइम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा, हमारा KID कैप्सूल तमाम मुश्किलों के बावजूद PSLV C62 से अलग हो गया। यह न सिर्फ चला, बल्कि इसने डेटा भेजना शुरू कर दिया। हम प्रक्षेप पथ का पुनर्निर्माण कर रहे हैं। पूरी रिपोर्ट जल्द आएगी।
अंतरिक्ष औद्योगीकरण को सक्षम बनाने के लिए करती है काम
कंपनी ने कहा कि वह अंतरिक्ष औद्योगीकरण को सक्षम बनाने के लिए काम करती है। उसका लक्ष्य कक्षा से पृथ्वी तक नियमित, कुशल और सुलभ उड़ानें उपलब्ध कराना है। इसमें ऐसा कैप्सूल डिजाइन करना भी शामिल है, जो री-एंट्री के हाई टेंपरेचर को सहन कर सकें। यह सुनिश्चित किया जा सके कि स्पेस से पृथ्वी तक ऐसी कार्गो यात्राएं अपेक्षाकृत कम लागत वाली हों।
सम्बंधित ख़बरें
19 अप्रैल का इतिहास: भारत का पहला उपग्रह अंतरिक्ष के सफर पर निकला
अब अंतरिक्ष में भी स्मार्टफोन की एंट्री, जानिए क्यों भेजा गया iPhone
अब टाइटन पर उड़ेगा परमाणु ड्रोन, NASA का नया मिशन कर सकता है चौंकाने वाला खुलासा!
17 मार्च का इतिहास : दुनिया में भारत का नाम रोशन करने वाली हरियाणा की दो बेटियों का जन्मदिन
क्या है KID?
KID टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर और कंपनी के प्रस्तावित वाहन कर्नेल का प्रोटोटाइप था। इसका मकसद कक्षा से पृथ्वी पर 120 किलो का पेलोड वापस लाना है। ऑर्बिटल पैराडाइम के को-फाउंडर और सीईओ फ्रांसेस्को कैसियाटोर ने मिशन से पहले लिखा था कि KID को अंतरिक्ष में भेजने का उद्देश्य वायुमंडलीय री-एंट्री पर महारत पाने की दिशा में कंपनी को और आगे ले जाना है। अन्य मिशन चरणों के विपरीत री-एंट्री के दौरान उत्पन्न होने वाली सभी स्थितियों को एक समय में जमीन पर सटीक रूप से दोहराना संभव नहीं है।
यह भी पढ़ें: नवभारत विशेष: PSLV C62 लॉन्च विफल, ISRO को नाकामी से लेना होगा गंभीर सबक
मिशन में गड़बड़ी क्या हुई?
PSLV-C62 रॉकेट विदेशी पृथ्वी अवलोकन उपग्रह समेत 16 उपग्रहों को लेकर अंतरिक्ष के लिए रवाना हुआ था। इसे प्रक्षेपण के तीसरे चरण में गड़बड़ी का सामना करना पड़ा। इसरो ने जानकारी दी कि रॉकेट उड़ान पथ से भटक गया। उपग्रहों को तय कक्षा में स्थापित करने में विफल रहा। यह लगातार दूसरी बार है, जब पीएसएलवी मिशन तीसरे चरण में गड़बड़ी के कारण विफल हो गया। पेलोड में एक विशेष टैंकर उपग्रह, आयुलसैट और ध्रुवा स्पेस के साथ छात्रों द्वारा बनाए गए कुछ उपग्रह भी थे। इसरो अध्यक्ष वी नारायणन ने बताया है कि उड़ान के तीसरे चरण में जब स्ट्रैप-ऑन मोटर पीएसएलवी-सी62 को निर्धारित ऊंचाई तक ले जाने के लिए थ्रस्ट प्रदान कर रहे थे, तब रॉकेट में गड़बड़ी आई और वह उड़ान पथ से विचलित हो गया। रॉकेट में गड़बड़ी आने और उसके उड़ान पथ से भटकने के कारणों का पता लगाने के लिए विश्लेषण शुरू कर दिया गया है।
