‘वंदे मातरम’ बनाम ‘तमिल थाई वाज्तु’, कोर्ट ने गृह मंत्रालय के सर्कुलर को चुनौती देने वाली याचिका को दी अनुमति
Tamil Thai Vazhthu Controversy: वंदे मातरम से सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत के गृह मंत्रालय के सर्कुलर को चुनौता देने वाली याचिका दाखिल करने को मद्रास हाई कोर्ट अनुमति दे दी है।
- Written By: अमन मौर्या
मद्रास हाई कोर्ट (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Madras High Court Vande Mataram: मद्रास हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा जारी उस सर्कुलर को चुनौती देने के लिए याचिकाकर्ता को नई याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी है, जिसमें सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ के गायन से करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक संबंधित सर्कुलर की वैधता को सीधे चुनौती नहीं दी जाती, तब तक इस विषय पर कोई विशेष निर्देश जारी करना उचित नहीं होगा।
विजय के शपथ ग्रहण का है मामला
यह मामला चेन्नई निवासी अनन्या राधाकृष्णन द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में तमिलनाडु में सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत पारंपरिक रूप से ‘तमिल थाई वाज्तु’ के गायन से किए जाने की व्यवस्था को बहाल करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने यह याचिका 10 मई को तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय और उनके मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह के बाद दायर की थी।
‘वंदे मातरम’ और ‘तमिल थाई वाज्तु’ के पर विवाद
याचिका में कहा गया था कि शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान के साथ हुई, जबकि ‘तमिल थाई वाज्तु’ का गायन बाद में किया गया। याचिकाकर्ता का तर्क था कि तमिलनाडु में लंबे समय से सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत ‘तमिल थाई वाज्तु’ से होती रही है और समापन राष्ट्रगान के साथ किया जाता है। इस परंपरा में बदलाव से राज्य की सांस्कृतिक पहचान और भावनाओं पर असर पड़ सकता है।
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तमिल समाज की पहचान
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि ‘तमिल थाई वाज्तु’, जिसे तमिल विद्वान मनोन्मनीयम सुंदरनार ने 1891 में लिखा था, तमिल समाज की सांस्कृतिक विरासत और पहचान का प्रतीक माना जाता है। याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध न तो ‘वंदे मातरम’ से है और न ही राष्ट्रगान से, बल्कि वे केवल राज्य की स्थापित परंपरा को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं।
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कोर्ट ने दिया तर्क
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने कहा कि गृह मंत्रालय का सर्कुलर केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के राज्यों पर लागू होता है। ऐसे में सर्कुलर की वैधता को चुनौती दिए बिना अदालत से कोई निर्देश मांगना उचित नहीं है।
अदालत की इस टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता के वकील ने मौजूदा याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी ताकि केंद्र सरकार के सर्कुलर को सीधे चुनौती देते हुए नई याचिका दाखिल की जा सके। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति प्रदान कर दी और नई कानूनी कार्यवाही शुरू करने की छूट दे दी।
एजेंसी इनपुट के साथ…
