रातभर चली संसद, मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू करने को दी गई मंजूरी, अमित शाह ने कही ये बात
लोकसभा में देर रात मणिपुर पर चर्चा के बाद राष्ट्रपति शासन को मंजूरी कर दी गई है। अमित शाह ने कहा कि प्रदेश के हालात को भाजपा से जोड़कर न देखें। पहले भी कई बड़ी हिंसा हुई थीं। हमारी प्राथमिकता शांति बनाए रखने की है।
- Written By: यतीश श्रीवास्तव
लोकसभा में अमित शाह। (सौजन्य : सोशल मीडिया)
नई दिल्ली : लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल को लेकर संसद में देर रात तक पक्ष और विपक्ष के बीच हंगामा मचा रहा। सांसदों की बीच कई बार तीखी नोकझोंक के बाद विधेयक पास कर दिया गया। इसके बाद मणिपुर में हालात पर चर्चा के लिए करीब आधी रात को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने प्रस्ताव पेश किया। हालांकि विपक्ष के कई सांसदों ने इस पर आपत्ति जताई लेकिन स्पीकर ओम बिड़ला की अनुमति के बाद चर्चा शुरू हुई जिसके बाद प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई।
लोकसभा में बुधवार को संसद सत्र शुरू हुआ तो हंगामा देर रात चलता रहगा। रात एक बजे करीब वक्फ संशोधन बिल पास होने के बाद मणिपुर पर भी अमित शाह ने प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष और पक्ष के बीच चर्चा के बाद सहमति बनने पर मणिपुर में राष्ट्रपति शासन का प्रस्ताव रात करीब 3.40 बजे पास कर दिया गया।
अमित शाह ने मणिपुर प्रस्ताव पर रखी बात
अमित शाह ने कहा कि मणिपुर में सीएम के इस्तीफे के बाद प्रकरण पर राज्यपाल ने विधायकों से चर्चा की थी। सभी ने कहा था कि वह फिलहाल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं हैं जिसके बाद वहां प्रेसिडेंट रूल लगाया गया। शाह ने कहा कि प्रदेश में हालात फिलहाल चिंताजनक हैं। हालांकि पिछले तीन-चार महीने में वहां हिंसा की कोई ऐसी बड़ी घटना नहीं हुई है। हमारी पहली चिंता ये है कि किसी तरह क्षेत्र में शांति व्यवस्था को बनाए रखा जाए।
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नागरिकों की सुविधाओं का ध्यान रखा जा रहा
प्रदेश में स्थिति फिलहाल सामान्य है। आम नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं और भोजन आदि की सामग्री पहुंचाई जा रही है। स्वास्थ्य सुविधाओं का भी ख्याल रखा जा रहा है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया गया है और बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई करवाई जा रही है। हालात धीरे धीरे सामान्य हो रहे हैं।
हिंसा को भाजपा काल से न जोड़ें, पहले भी घटनाएं हुईं हैं
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि मणिपुर में हिंसा की घटनाएं पहले भी हुई है। इसे पार्टी विशेष से न जोड़ें तो बेहतर होगा। भाजपा शासन काल से पहले प्रदेश में तीन बड़ी हिंसा की घटनाएं हुई हैं। उस दौरान वहां कभी प्रधानमंत्री दौरा करने भी नहीं गए थे। हम ये नहीं कहते कि हालात सुधर गए हैं लेकिन फिलहाल कुछ कंट्रोल में है। हम शांति बनाए रखने के जरूरी कदम उठा रहे हैं।
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13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन किया गया था लागू
मणिपुर में जातीय हिंसा के बाद हालात बिगड़ने पर प्रदेश मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद स्थिति नियंत्रण के लिए प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश की गई थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस सिफारिश को मंजूर कर लिया था। इसके बाद 13 फरवरी से प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। अब बुधवार देर रात चर्चा के बाद इस प्रस्ताव को फिर से मंजूरी दे दी गई है।
