किश्तवाड़ त्रासदी: 1 मिनट में खत्म 52 लोगों की जिंदगी, खून से सनी लाशें बयां कर रही हादसे का मंजर..

Kishtwar Tragedy: जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड़ के चशोटी गांव में 14 अगस्त को प्राकृतिक आपदा ने अपना कहर बरपाया। 12:30 बजे बादल फटा। कई लोग हादसे के दौरान पहाड़ से निकल रहे पानी और मलबे की चपेट में आ गए।
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किश्तवाड़ त्रासदी, चंद सेकेंड में बदला इलाके का मंजर (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Jammu Kashmir Kishtwar Cloud Brust: जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड़ के चशोटी गांव में बीते 14 अगस्त की दोपहर 12:30 एक भयानक प्राकृतिक हादसा हो गया। अचानक से बादल फटने की वजह से पूरे इलाके में अफरा-तफरी और भय का माहौल छा गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए भागते नजर आए। लेकिन फिर भी कई लोग पहाड़ से आए पानी और मलबे की चपेट में आ गए।

हादसे में अब तक 52 लोगों की मौत हो गई है। साथ ही 167 लोगों को बचाया जा चुका है। करीब 100 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। हजारों श्रद्धालु मचैल माता यात्रा के लिए किश्तवाड़ में पड्डर सब-डिवीजन में चशोटी गांव पहुंचे थे।

इसी दौरान यह भयानक हादसा हो गया। यह माता के दर्शन का पहला पड़ाव है। बादल इसी जगह फटा है, जहां से यात्रा शुरू होने वाली थी। यहां श्रद्धालुओं की बसें, टेंट, लंगर और कई दुकानें थीं। सभी कुछ अचानक से आई इस त्रासदी के शिकार हो गए।

हादसे का मंजर अत्यंत डरावना

इस त्रासदी के मंजर सचमुच डराने वाले हैं। हादसे के बाद मलबे में कई शव खून से सने मिले। लोगों के फेफड़ों में कीचड़ भर गया था। चारों तरफ लोगों की टूटी पसलियां और अंग बिखरे पड़े थे। इलाके के स्थानीय लोगों,सेना के जवानों और पुलिस की मदद से घंटों की मेहनत के बाद कीचड़ भरे इलाके से खोदकर घायलों को अपनी पीठ पर लादकर अस्पताल पहुंचाया गया।

मचैल माता मंदिर के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ थी जमा

जानकारी के अनुसार चशोटी गांव नियंत्रण रेखा के करीब है। यहां लगभग 150 घर और 700 लोग एक साथ रहते हैं। चशोटी का यह इलाका मचैल माता मंदिर का पहला पड़ाव है। माता की मंदिर यात्रा में हजारों लोग हर साल आते हैं। इस बार यात्रा 25 जुलाई से चल रही है, जो 5 सितंबर तक चलनी तय हुई थी।

बीते गुरुवार को भी यहां सैलानियों की भीड़ थी। माता के मंदिर के पास ही लंगर चल रहा था और टेंट लगे हुए थे। इसी दौरान दोपहर करीब 12 बजे दो किमी ऊपर पहाड़ पर बादल फटा और कुछ ही मिनट में वहां से बाढ़ का सैलाब आ गया।

स्थानीय लोगों ने अचानक से आई इस आपदा को भांपते ही यात्रियों को चिल्लाकर दूर जाने को कहा। तब यात्री मंदिर के रास्ते पर लाइन लगाकर खड़े थे। इसी दौरान बाढ़ पहाड़ से उतरकर नीचे आ गई। चंद सेकेंड में ऐसा हादसा हुआ जिसने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया और लाशों की ढेर लग गई।

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