

Kiren Rijiju Rahul Gandhi Meeting In Delhi: भारतीय राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अक्सर तीखी नोकझोंक देखने को मिलती है, लेकिन हाल ही में एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद रिजिजू का एक बयान सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हम राजनीतिक विरोधी जरूर हैं, लेकिन दुश्मन नहीं।",
दिल्ली में हुई इस मुलाकात को किरेन रिजिजू ने काफी सकारात्मक बताया। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने साझा किया कि राहुल गांधी के साथ उनकी चर्चा काफी अच्छी रही। रिजिजू ने बताया कि बैठक के दौरान एक विशेष मुद्दे के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण संसदीय विषयों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। सरकार की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि वह कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों के साथ बेहतर संवाद और समन्वय बनाए रखना चाहती है ताकि लोकतंत्र की गरिमा बनी रहे।
रिजिजू ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन इन मतभेदों को व्यक्तिगत दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंततः सभी दलों का लक्ष्य देश की सेवा करना ही है, इसलिए देशहित के मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष को मिलकर काम करना चाहिए।, रिजिजू ने चिंता जताते हुए यह भी कहा कि संसद का कामकाज लगातार बाधित होने से न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि इसका सीधा नुकसान पूरे देश को उठाना पड़ता है।
एक तरफ जहां समन्वय की बातें हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ संसद में टकराव की स्थिति भी बनी हुई है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया। खरगे ने मांग की कि गृह मंत्री अमित शाह को खुद सदन में आकर इस कार्रवाई पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष केवल जनता से जुड़े गंभीर मुद्दे उठा रहा है और वह चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।
जब किरेन रिजिजू से गृह मंत्री के बयान पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि अमित शाह संसद में ही मौजूद हैं और अपने मंत्रालय से संबंधित विधायी कार्यों में व्यस्त हैं। हालांकि, रिजिजू ने खरगे के रुख पर आपत्ति जताते हुए कहा कि विपक्ष के नेता सदन की चेयर (सभापति) को निर्देश नहीं दे सकते, बल्कि केवल अनुरोध कर सकते हैं। उन्होंने कांग्रेस के नए सांसदों को भी निशाने पर लिया और कहा कि उन्हें संसदीय परंपराएं सीखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है, जिससे सदन की गरिमा प्रभावित होती है।
सदन में जारी इस गतिरोध के बीच राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने बीच-बचाव की भूमिका निभाई। उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से कहा कि वे विपक्ष की भावनाओं को पूरी तरह से खारिज न करें। सभापति ने सुझाव दिया कि विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी का जो अनुरोध किया है, उस संदेश को संबंधित मंत्री (अमित शाह) तक पहुँचाना ही संसदीय कार्य मंत्री के रूप में उचित कदम होगा।
इस मुलाकात और बयानों के दौर के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाले दिनों में संसद के हंगामे में कोई कमी आएगी या फिर वार-पलटवार का यह सिलसिला इसी तरह जारी रहेगा।