केरल कांग्रेस में गुटबाजी तेज, CM वीडी सतीशन की कार्यशैली पर उठे सवाल; वेणुगोपाल गुट ने खोला मोर्चा

Kerala Congress Infighting: केरल कांग्रेस में वी.डी. सतीशन और के.सी. वेणुगोपाल खेमों के बीच टकराव तेज हो गया है। सरकार के फैसलों और संगठन में बढ़ती गुटबाजी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
Factionalism intensifies within the Kerala Congress; questions raised over CM VD Satheesan's style of functioning; Venugopal faction opens a front.
केसी वेणुगोपाल और वीडी सतीशन (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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VD Satheesan VS KC Venugopal: केरल में सत्तारूढ़ कांग्रेस एक बार फिर आंतरिक गुटबाजी के दौर से गुजरती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की कार्यशैली और सरकार पर बढ़ते प्रभाव को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है, जिससे यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार के शुरुआती कार्यकाल पर ही राजनीतिक दबाव बढ़ गया है।

ताजा विवाद इस आरोप को लेकर है कि राज्य सरकार कई महत्वपूर्ण नीतिगत और प्रशासनिक फैसले पार्टी संगठन से पर्याप्त परामर्श किए बिना ले रही है।

राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल के समर्थक नेताओं ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) नेतृत्व की तत्काल बैठक बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि हाल ही में संपन्न विधानसभा सत्र के दौरान कई ऐसे मुद्दे सामने आए, जिन पर पार्टी स्तर पर चर्चा जरूरी है।

पहले भी होता रहा है संघर्ष

केरल कांग्रेस में गुटीय संघर्ष कोई नई बात नहीं है। समय के साथ नेतृत्व बदलता रहा है, लेकिन आंतरिक खींचतान लगातार बनी रही है। वर्तमान में पार्टी के दो प्रमुख शक्ति केंद्र मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और के.सी. वेणुगोपाल माने जाते हैं, जबकि वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला का भी एक स्वतंत्र समर्थन आधार मौजूद है।

CM की लोकप्रियता से वेणुगोपाल खेमा चिंतित

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री पद की दौड़ में वेणुगोपाल पर बढ़त हासिल करने के बाद सतीशन की स्थिति और मजबूत हुई है। विधानसभा में उनके प्रभावी प्रदर्शन और प्रशासनिक अनुभव सीमित होने के बावजूद सरकार के संचालन में दिखाई गई आत्मविश्वासपूर्ण भूमिका ने उनकी राजनीतिक साख को और बढ़ाया है।

हालांकि, सतीशन की बढ़ती लोकप्रियता और प्रभाव ने वेणुगोपाल खेमे की चिंता बढ़ा दी है। इस गुट को आशंका है कि यदि समय रहते संतुलन नहीं बनाया गया तो सतीशन राज्य सरकार और कांग्रेस संगठन दोनों में निर्विवाद शक्ति केंद्र बन सकते हैं।

विपक्ष और कांग्रेस नेताओं के मुद्दे एक

वेणुगोपाल समर्थक नेताओं की शिकायतों में राज्य निर्वाचन आयुक्त और देवस्वम प्लीडर की नियुक्तियां शामिल हैं। इसके अलावा वित्त विधेयक में कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों को अनुमति देने संबंधी प्रावधान को लेकर भी नाराजगी जताई गई है। आरोप है कि इन मुद्दों पर पार्टी मंचों को विश्वास में नहीं लिया गया।

दिलचस्प बात यह है कि विधानसभा में विपक्ष ने जिन फैसलों को लेकर सरकार को घेरा, कांग्रेस के कई नेताओं का दावा है कि उन्हें भी इन निर्णयों की पूर्व जानकारी नहीं थी।

विवाद का संगठनात्मक पहलू

विवाद का एक संगठनात्मक पहलू भी है। केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ के राज्य मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद कांग्रेस के पास फिलहाल पूर्णकालिक प्रदेश अध्यक्ष नहीं है। ऐसे में अगले केपीसीसी अध्यक्ष की नियुक्ति और राज्य के विभिन्न निगमों व बोर्डों में होने वाली नियुक्तियों को लेकर भी खेमेबाजी तेज हो गई है। वहीं, मुख्यमंत्री सतीशन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह सरकार के दैनिक कामकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेंगे।

सूत्रों के अनुसार, वेणुगोपाल गुट इन नियुक्तियों को सतीशन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के अवसर के रूप में देख रहा है। उनके इस रुख से दोनों गुटों के बीच तनाव और बढ़ गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली केपीसीसी नेतृत्व की बैठक काफी अहम और संभावित रूप से विवादपूर्ण मानी जा रही है।

एजेंसी इनपुट के साथ...

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