

Karnataka BJP New President Candidate: कर्नाटक में नए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के नाम की कवायद तेज हो गई है। भाजपा की तरफ से केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाए गए विजयंत जय पांडा और सह संगठन मंत्री शिवप्रकाश राज्य में वरिष्ठ नेताओं से राय मशविरा करके दिल्ली आ गए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बीजेपी के केंद्रीय पर्यवेक्षक, राज्य में करीब 33 वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग मिले और उनकी राय जानी।
बता दें कि पर्यवेक्षकों को कंसल्टेशन के लिए राज्य में 35 नेताओं से संपर्क भी करना था, लेकिन इनमें से दो नेता इस समय विदेश यात्रा में हैं। इस वजह से उनसे चर्चा नहीं हो पाई।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के साथ मंत्रिपरिषद की बैठक में शामिल होने की वजह से केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी बेंगलुरु में उपस्थित नहीं थे, इसलिए शुक्रवार को दिल्ली वापस आकर पर्यवेक्षकों ने प्रहलाद जोशी से भी मुलाकात किया और उनका मंतव्य जाना। कर्नाटक में भाजपा नेताओं से मिले फीडबैक को केंद्रीय पर्यवेक्षक विजयंत जय पांडा और सह संगठन मंत्री शिवप्रकाश ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को सौंप दिया है। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और कर्नाटक के दिग्गज नेता बीएस येदियुरप्पा की भी राय ली गई।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कर्नाटक के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र के रिपीट होने प्रबल संभावना है। प्रदेश अध्यक्ष की रेस में उनका नाम सबसे आगे है। जानकारी के अनुसार, दिल्ली से आए केंद्रीय पर्यवेक्षकों को वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र के पक्ष में ज्यादातर नेताओं ने अपनी सहमति दी है। बता दें विजयेंद्र का कार्यकाल इसी वर्ष नवंबर में समाप्त होने वाला है।
मौजूदा अध्यक्ष के साथ अन्य नाम भी कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में शामिल हैं। इनमें सबसे प्रमुख नाम प्रदेश महासचिव वी. सुनील कुमार का है। OBC समुदाय से आने वाले सुनील भाजपा की पिछली सरकार में मंत्री भी रहे। इसके अलावा अरविंद बल्लाढ का नाम भी चर्चा में है। बल्लाढ कर्नाटक से भाजपा विधायक हैं।
वे लिंगायत समुदाय के पंचमसाली उप-संप्रदाय से आते हैं। बता दें राज्य में लिंगायतों में पंचमसाली की संख्या करीब 60 फीसदी है। इसलिए इनके नाम पर भी भाजपा नेतृत्व सहमति जता सकता है।
देश में कर्नाटक का साथ तीन अन्य राज्यों को भी जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष मिलने वाले हैं। इसकी तैयारी भी चल रही है। इसमें हरियाणा, दिल्ली और त्रिपुरा शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए दिल्ली और हरियाणा में प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाएगा।