मुशर्रफ की साजिश पर भारत ने फेरा पानी, 15 प्वाइंट्स में जानिए ‘कारगिल’ की कहानी
Kargil Vijay Diwas 2025: 26 साल पहले पड़ोसी 'पाक' की एक नापाक साजिश को भारतीय जवानों ने नेस्तनाबूद कर के उन्हें धूल चटा दी थी, तभी से हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के तौर पर मनाया जाता है।
- Written By: अभिषेक सिंह
कारगिल विजय दिवस (सोर्स- सोशल मीडिया)
Kargil Vijay Diwas: 26 साल पहले पड़ोसी पाक की एक नापाक साजिश ने कारगिल युद्ध की पटकथा लिख दी। इस युद्ध में मां भारती के रणबांकुरों ने अद्भुत और अदम्य साहस का परिचय देते हुए घुसपैठियों और पाकिस्तानी सेना को सरजमीं-ए-हिंद से खदेड़कर वापस कब्जा कर लिया। तभी से 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के तौर पर मनाया जाता है।
कारगिल भारतीय राज्य लद्दाख (अब केन्द्र शासित प्रदेश) का एक सीमावर्ती क्षेत्र है। पाकिस्तानी सेना ने आतंकवादियों के साथ मिलकर नियंत्रण रेखा पार करके कारगिल क्षेत्र की कई पहाड़ियों पर कब्ज़ा कर लिया था। 3 मई 1999 को एक चरवाहे ने भारतीय सेना को कारगिल में पाकिस्तानी सेना की घुसपैठ की सूचना दी थी।
परवेज मुशर्रफ ने रची थी साजिश
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने कारगिल युद्ध की साजिश रची थी। हालांकि, हमारे वीर सैनिकों ने उनके नापाक इरादों को पूरा नहीं होने दिया। पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़कर मार गिराया गया। ऐसा माना जाता है कि उस समय मुशर्रफ ने देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की जानकारी के बिना ही युद्ध की योजना बनाई थी।
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‘अटल’ ने सेना को दिया आदेश
कारगिल घुसपैठ के दौरान केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी, जिन्हें इस घुसपैठ की जानकारी दी गई थी। जानकारी मिलने के बाद वाजपेयी सरकार ने सेना को घुसपैठियों को मार गिराने और अपने क्षेत्र पर पुनः कब्ज़ा करने का आदेश दिया।
कारगिल युद्ध की पूरी टाइमलाइन
- 3 मई 1999: कारगिल के स्थानीय चरवाहों ने भारतीय सेना को क्षेत्र में पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना दी।
- 10 मई 1999: भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन विजय’ का आगाज किया।
- 26 मई 1999: भारतीय सेना ने हवाई हमला किया।
- 27 मई 1999: भारतीय वायु सेना का एक मिग-27 विमान मार गिराया गया। वायु सेना के 4 चालक दल के सदस्य मारे गए। पाकिस्तान ने विमान से निकले पायलट को युद्धबंदी बनाकर पकड़ लिया।
- 31 मई 1999: तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने घोषणा की कि कारगिल में युद्ध जैसी स्थिति है।
- 1 जून 1999: अमेरिका और फ्रांस ने भारत के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया।
- 5 जून 1999: भारतीय सेना ने कुछ ऐसे दस्तावेज़ जारी किए जिनसे पाकिस्तान की सीधी संलिप्तता का पता चल गया।
- 9 जून 1999: बटालिक सेक्टर में भारतीय सेना ने दो महत्वपूर्ण ठिकानों पर पुनः कब्ज़ा कर लिया।
- 10 जून 1999: पाकिस्तान ने जाट रेजिमेंट के 6 सैनिकों के क्षत-विक्षत शव लौटा दिए।
- 13 जून 1999: भारतीय सेना ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए महत्वपूर्ण तोलोलिंग चोटी पर पुनः कब्ज़ा कर लिया।
- 20 जून 1999: भारतीय सेना ने 11 घंटे की लड़ाई के बाद टाइगर हिल के पास पॉइंट 5060 और पॉइंट 5100 पर कब्ज़ा कर लिया।
- 4 जुलाई1999: बहादुर भारतीय सैनिकों ने दुश्मन को खदेड़कर टाइगर हिल पर कब्ज़ा कर लिया और पाकिस्तानियों का मनोबल टूट गया।
- 11 जुलाई 1999: पाकिस्तानी सैनिक डर के मारे पीछे हटने लगे। भारतीय सेना ने बटालिक की प्रमुख चोटियों पर कब्ज़ा कर लिया।
- 14 जुलाई 1999: भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन विजय’ की सफलता का ऐलान कर दिया।
- 26 जुलाई 1999: ‘कारगिल विजय दिवस’ की आधिकारिक घोषणा की गई।
यह भी पढ़ें: क्या था ऑपरेशन सफेद सागर? 40 दिनों के हवाई ऑपरेशन से कैसे विजय हुआ कारगिल युद्ध
562 सैनिकों ने दिया सर्वोच्च बलिदान
यह भारत और पाकिस्तान के बीच एक सशस्त्र संघर्ष था। यह युद्ध 60 दिनों से अधिक समय तक लड़ा गया। के दौरान हमारे सैनिकों की अद्भुत वीरता और अटूट दृढ़ संकल्प ने दुश्मन को भारतीय चौकियों से पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। हालाँकि, इस युद्ध में, 562 भारतीय सैनिक शहीद हुए और 1363 अन्य घायल हुए।
