जयंती विशेष : मनमोहन सिंह नहीं बल्कि पीवी नरसिम्हाराव थे पहले 'एक्सीडेंटल पीएम', जानिए कैसे मिली थी कुर्सी

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दुनिया 'एक एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' के तौर पर जानती है। लेकिन अगर पूर्व उससे भी पहले के प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को यह संज्ञा दी जाए तो ग़लत नहीं होगा। क्योंकि वह प्रधानमंत्री तब बने, जब राजनीति से लगभग रिटायरमेंट ले चुके थे।
PV Narsimha Rao
पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव (सोर्स-सोशल मीडिया)
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नवभारत डेस्क, नागपुर : पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दुनिया 'एक एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' के तौर पर जानती है। लेकिन अगर पूर्व उससे भी पहले के प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को यह संज्ञा दी जाए तो ग़लत नहीं होगा। क्योंकि वह प्रधानमंत्री तब बने, जब राजनीति से लगभग रिटायरमेंट ले चुके थे। उन्होंने 1991 में लोकसभा का चुनाव भी नहीं लड़ा था। लेकिन कुछ ऐसा हुआ कि चुनाव के बाद उन्हें प्रधानमंत्री बनना पड़ा। आज 28 जून को उनकी जयंती है। क्यों उन्हें एक्सीडेंटल पीएम कहना चाहिए।

दूसरी तरफ 1991 के चुनाव के पहले तक नरसिम्हाराव 69 साल के हो चुके थे। राजीव गांधी भी उस दौरान युवाओं को मौका देना चाहते थे। ऐसे में नरसिम्हाराव ने सियासत से दूरी बनाने का फैसला ले लिया था। कहा तो यह भी जाता है कि उन्होंने गांव जाने की तैयारी भी बना ली थी। लेकिन उनकी किस्मत उन्हें पीएम की कुर्सी तक पहुंचाना चाह रही थी।

पीवी नरसिम्हा राव दक्षिण भारत से आने वाले पहले ऐसे राजनेता थे जिन्हें भारत के प्रधान मंत्री की कुर्सी हासिल हुई थी। इतना ही नहीं राव पहले ऐसे कांग्रेस नेता भी हैं जिन्हें गांधी परिवार से इतर पीएम की कुर्सी हासिल हुई थी।

क्यों कहना चाहिए एक्सीडेंटल पीएम

तारीख़ थी 21 मई 1991, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में रैली कर रहे थे। यहां एक आत्मघाती हमले में उनकी मौत हो गई। इस घटना से लगभग आप सभी वाकिफ होंगे। जिसके बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली। कांग्रेस के सामने इस समय प्रश्न था कि पीएम किसे बनाया जाए। इस दौरान किसी और के नाम पर सहमति नहीं बनी तो पीवी नरसिम्हाराव का नाम सामने आया। जिस पर न किसी को आपत्ति नहीं हुई। उन्हें पीएम बनाया गया जिसके बाद उपचुनाव में वह सांसद चुने गए।

भारत को आर्थिक संकट से उबारा

1991 में उनके पीएम बनते ही भारत पर दुनिया में छाई आर्थिक मंदी का असर दिखने लगा। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कम हो गया। जिसके बाद नरसिम्हा राव की सरकार ने मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री नियुक्त किया, और दोनों ने मिलकर वैश्वीकरण, उदारीकरण और निजीकरण जैसे तीन आर्थिक सुधारों के जरिए देश को इस संकट से बाहर निकाल दिया।

कौन थे पीवी नरसिम्हा राव?

पामुलपर्थी वेंकट नरसिम्हा राव का जन्म 28 जून 1921 वारंगल के नरसंपेट मंडल के लक्नेपल्ली गांव में एक तेलुगु नियोगी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। यह जिला वर्तमान में तेलंगाना में है। एक वकील और अविभाजित आंध्र प्रदेश के कद्दावर कांग्रेस नेता थे, जो भारत के 9वें प्रधान मंत्री बने। उन्होंने 1991 से 1996 के बीच देश पर शासन किया। पूर्व प्रधान मंत्री पीवी नरसिम्हा राव को बीती 9 फरवरी को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया है।

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