

देश में बढ़ रहा नाबालिकों के तस्करी का मामला
मानव तस्करी को रोकने के लिए सरकार के सामने बड़ी चुनौती
झारखंड की 4 नाबालिक लड़किया दिल्ली, जयपुर से बरामदी के बाद चर्चा में मानव तस्करी
Human Trafficking Network From Jharkhand To Delhi: देश में मानव तस्करी का जाल बहुत जटील है। सरकार इसके लिए तमाम तरह के उपाय कर रही है। इसी बीच झारखंड की 4 नाबालिग लड़कियों को दिल्ली और जयपुर से बरामद किया गया है।
आर्थिक मंदी, परिवार की हालात को सुधारने की चाह लिए लड़कियां घर की दहलीज लांघ कर जब घर से बाहर निकलती तो आर्थिक मदद का झांसा देकर लोगों को अपने जाल में फंसाने से लेकर जबरन शोषण तक, मानव तस्करी के कई रूप हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि यह समस्या देश में लगातार पुलिस और प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है।
पुलिस के अनुसार, झारखंड की दिल्ली से बरामद तीन लड़कियां करीब एक साल पहले अपने घरों से लापता हो गई थीं। काफी खोज के बाद भी जब लड़कियों का कोई पता नहीं चला तो परिजनों ने पुलिस में शिकायत की। इसके बाद से ही पुलिस उनकी तलाश कर रही थी। जांच के दौरान मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने दिल्ली में कार्रवाई की और तीनों को सुरक्षित बरामद कर लिया। जयपुर से जिस लड़की को बरामद किया गया है, वह करीब 11 साल से अपने परिवार से दूर थी। पुलिस ने जांच के दौरान उसका पता लगाया और उसे बरामद करने में सफलता हासिल की।
NCRB से संबंधित 2024 के आंकड़ों के अनुसार, देश में मानव तस्करी के अपराध में भारतीय दंड संहिता और भारतीय न्याय संहिता के तहत कुल1,549 मामले दर्ज किए गए। इनमें IPC के तहत 790 और BNS के तहत 759 मामले शामिल हैं।
इसी डेटासेट के मुताबिक, तस्करी के शिकार लोगों के शोषण से जुड़े अपराधों में IPC के तहत 159 और BNS के तहत 131 मामले दर्ज हुए। यानी दोनों कानूनी श्रेणियों को मिलाकर ऐसे 290 मामले सामने आए।
केंद्र सरकार ने 30 जुलाई 2024 को लोकसभा में दिए गए जवाब में नाबालिगों को मानव तस्करी से बचाने के आंकड़े साझा किए थे।
11 मार्च 2026 को संसद में गृह मंत्रालय ने बताया था कि NCRB की Crime in India रिपोर्ट उस समय वर्ष 2023 तक उपलब्ध थी। भारत में 2024 तक प्राप्त आकड़ों के अनुसार लापता दर्ज बच्चे 98,375 लड़कियां 75,603 लड़के 22,768 शामिल हैं। वहीं साल 2023 में देशभर में 91,296 बच्चे लापता दर्ज किए गए, जिनमें 68,835 लड़कियां थीं।
मानव तस्करी में बच्चों और किशोर-किशोरियों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है। केंद्र सरकार की ओर से जुलाई 2024 में जारी जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 में 18 वर्ष से कम आयु के 3,098 तस्करी पीड़ितों को बचाया गया था। इससे पहले 2021 में 2,691, 2020 में 2,151, 2019 में 2,746 और 2018 में 2,484 नाबालिगों को बचाया गया था।
केंद्र सरकार ने मानव तस्करी की रोकथाम, जांच और पीड़ितों के पुनर्वास के लिए कई व्यवस्थाएं बनाई हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 807 तथा सीमा सुरक्षा बल (BSF) में 15 और सशस्त्र सीमा बल में 5 मानव तस्करी रोधी इकाइयां कार्यरत है। इस तरह कुल 827 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की जानकारी दी गई।
इसके अलावा, अपराध से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर और पीड़ितों के राहत एवं पुनर्वास के लिए मिशन शक्ति के अंतर्गत शक्ति सदन जैसी व्यवस्थाएं भी हैं।
मानव तस्करी के मामलों में केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। नौकरी, घरेलू काम, बेहतर शिक्षा या अच्छे भविष्य का लालच देकर लोगों को फंसाने की आशंका के प्रति जागरूकता भी जरूरी है। बच्चों के घर से अचानक लापता होने, संदिग्ध तरीके से दूसरे शहर ले जाए जाने या किसी अनजान व्यक्ति द्वारा रोजगार का लालच दिए जाने जैसी परिस्थितियों में सतर्क रहना चाहिए।
झारखंड से दिल्ली और जयपुर तक नाबालिग लड़कियों की बरामदगी से जुड़ा मामला यह सवाल उठाता है कि तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने, पीड़ितों की पहचान करने और उन्हें सुरक्षित पुनर्वास उपलब्ध कराने के लिए राज्यों के बीच समन्वय कितना प्रभावी है। सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है। सरकार के साथ-साथ हमारे भी मौलिक कर्तव्य है कि अगर हमारे आस-पास कोई संदिग्ध गतिविधी होते हुए दिखे तो तत्काल पुलिस को सुचित जरूर करें।