

नई दिल्ली: पिछले दो कार्यकालों में मजबूत सरकार के रूप में अपनी पहचान बनाने वाली केन्द्र की मोदी सरकार तीसरे कार्यकाल में बैकफुट पर दिखाई दे रही है। केंद्र सरकार की ओर से UPSC लेटरल एंट्री के विज्ञापन को रद्द करने का आदेश आने के बाद एक बार फिर से सियासत तेज हो गई है। विपक्ष इसे अपनी जीत के तौर पर पेश कर रहा है। जिसके बाद चर्चा होने लगी है कि इससे बीजेपी को नुकसान हो सकता है!
केंद्र सरकार ने मंगलवार को यूपीएससी लेटरल एंट्री रद्द करने का आदेश दे दिया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यूपीएससी चेयरमैन के चेयरमैन को चिठ्ठी लिखते हुए इसे वापस लेने का ऐलान कर दिया। कहा गया कि पीएम मोदी के आदेश पर फैसला बदला गया है। जिसके बाद विपक्ष ने मौके को हाथों-हाथ लपकते हुए अपनी जीत के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया।
लेटरल एंट्री का विज्ञापन रद्द होने के बाद राहुल गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा कि "संविधान और आरक्षण व्यवस्था की हम हर कीमत पर रक्षा करेंगे। भाजपा की ‘लेटरल एंट्री’ जैसी साजिशों को हम हर हाल में नाकाम कर के दिखाएंगे। मैं एक बार फिर कह रहा हूं- 50% आरक्षण सीमा को तोड़ कर हम जातिगत गिनती के आधार पर सामाजिक न्याय सुनिश्चित करेंगे।
इसके ठीक बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव का भी एक पोस्ट सामने आया। अखिलेश ने पोस्ट मे लिखा कि यूपीएससी में लेटरल एन्ट्री के पिछले दरवाज़े से आरक्षण को नकारते हुए नियुक्तियों की साज़िश आख़िरकार पीडीए की एकता के आगे झुक गयी है। सरकार को अब अपना ये फ़ैसला भी वापस लेना पड़ा है। भाजपा के षड्यंत्र अब कामयाब नहीं हो पा रहे हैं, ये PDA में आए जागरण और चेतना की बहुत बड़ी जीत है।
कन्नौज सांसद ने पोस्ट में आगे लिखा कि इन परिस्थितियों में समाजवादी पार्टी ‘लेटरल भर्ती’ के ख़िलाफ़ 2 अक्टूबर से शुरू होने वाले आंदोलन के आह्वान को स्थगित करती है, साथ ही ये संकल्प लेती है कि भविष्य में भी ऐसी किसी चाल को कामयाब नहीं होने देगी व पुरज़ोर तरीके से इसका निर्णायक विरोध करेगी। जिस तरह से जनता ने हमारे 2 अक्टूबर के आंदोलन के लिए जुड़ना शुरू कर दिया था, ये उस एकजुटता की भी जीत है। लेटरल एंट्री ने भाजपा का आरक्षण विरोधी चेहरा उजागर कर दिया है।
कहा जा रहा है कि मोदी सरकार का निर्णय वापस लेने से विपक्ष का संविधान और आरक्षण बचाओ नैरेटिव और ज्यादा मजबूत होगा। लोकसभा चुनाव में इस नैरेटिव का विपक्ष को कितना फायदा हुआ है यह बात किसी से छिपी नहीं है। वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार का बैकफुट पर जाना इस बात उसके कड़े और बड़े निर्णय लेने वाली छवि को धक्का पहुंचाएगा। जिसका नुकसान बीजेपी को आने वाले चुनाव में उठाना पड़ सकता है।
यूपीएससी ‘लेटरल एंट्री' के जरिए सीधे उन पदों पर उम्मीदवारों की नियुक्ति करता है, जिन पदों पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों की तैनाती होती है। इसमें निजी क्षेत्रों से अलग अलग क्षेत्र के विशेषज्ञों को विभिन्न मंत्रालयों व विभागों में सीधे ज्वाइंट सेक्रेटरी और डायरेक्टर व डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर नियुक्ति दी जाती है।