

INS Aridaman: भारत अपनी समुद्री ताकत को लगातार मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में आज स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी INS अरिदमन को भारतीय नौसेना में शामिल किया जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इसके औपचारिक कमीशनिंग समारोह में हिस्सा लेंगे। यह कदम भारत की सामरिक क्षमता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
INS अरिदमन देश में निर्मित तीसरी परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (INS Aridaman) है। इससे पहले इसी श्रेणी की INS अरिहंत को 2016 में और INS अरिघात को 2024 में नौसेना में शामिल किया जा चुका है। यह पनडुब्बी लंबे समय से समुद्र में परीक्षणों से गुजर रही थी और अब सफल ट्रायल के बाद इसे बेड़े में शामिल किया जा रहा है।
निजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एलएंडटी की भागीदारी से विशाखापत्तनम स्थित गुप्त शिपबिल्डिंग सेंटर में इसका निर्माण किया गया है। नौसेना में शामिल होने के बाद यह रणनीतिक बल कमान (SFC) के तहत भारत की परमाणु निवारक क्षमता को और मजबूत करेगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अवसर से पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए ‘अरिदमन’ को शक्ति का प्रतीक बताया।
इसी दिन रक्षा मंत्री विशाखापत्तनम में स्वदेशी युद्धपोत ‘तारागिरी’ को भी नौसेना के बेड़े में शामिल करेंगे। यह समारोह पूर्वी नौसेना कमान के तहत नौसैनिक डॉकयार्ड में आयोजित होगा, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहेंगे।
‘प्रोजेक्ट 17ए’ के तहत विकसित यह चौथा युद्धपोत करीब 6,670 टन वजनी है और इसे मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई ने तैयार किया है। इसकी डिजाइन ऐसी है कि रडार पर इसकी पहचान कम होती है, जिससे यह दुश्मन की नजर से बचने में सक्षम रहता है।
यह युद्धपोत 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक से बना है और इसमें अत्याधुनिक हथियार प्रणालियां शामिल हैं। इनमें सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और उन्नत पनडुब्बी रोधी प्रणाली शामिल हैं। इन सभी को आधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे किसी भी खतरे का तेजी और सटीकता से मुकाबला किया जा सके।