भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने रूस से कच्चा तेल खरीदने पर लगाया ब्रेक, नए विकल्प की तलाश जारी
Break on Russian crude oil : भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने फिलहाल लिया एक बड़ा निर्णय लिया है। रूस से कच्चा तेल खरीदने पर रोक लगाई है, जिससे निसंदेह ही अक्टूबर लोडिंग वाली खेप प्रभावित होगी।
- Written By: गीतांजली शर्मा
भारत की सरकारी तेल कंपनी ने रूस से तेल खरीद पर लगाया ब्रेक (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
Big decision of Indian oil companies: वर्तमान समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के देश पर किए गए वार के बाद, भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने एक बड़ा निर्णय लिया है। इन्होंने टैरिफ पर तनाव के बीच रूस से कच्चा तेल खरीदने पर रोक लगाई है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने अपने अगले बाइंग साइकिल में रूसी ‘यूराल्स’ ग्रेड कच्चे तेल की तुरंत खरीद को टालने का फैसला किया है।
तेल कंपनियों का यह निर्णय तब तक लागू रहेगा जब तक सरकार की ओर से कोई स्पष्ट आदेश नहीं आ जाता, लेकिन यह भी तय है कि तेल कंपनियों के इस फैसले से अक्टूबर लोडिंग वाली खेपें जरूर प्रभावित होंगी।
ट्रंप ने रूस पर दबाव बढ़ाने के मकसद से भारत को बनाया निशाना
रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने पिछले दिनों भारत पर टैरिफ 25 से 50 प्रतिशत तक बढ़ा दी। यहां तक कि सभी भारतीय निर्यातों पर टैरिफ को दोगुना कर दिया है। वहीं, यह कार्रवाई चीन जैसे अन्य बड़े खरीदारों पर लागू नहीं हुई है।
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यह स्पष्ट है कि वॉशिंगटन सीधे भारत को निशाना बना रहा है, जिससे रूस पर आर्थिक दबाव बढ़े। इस मामले में तेल मंत्रालय और कंपनियों ने फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, रिफाइनरों को गैर-रूसी तेल खरीदने की योजना बनाने के लिए बोल दिया गया है।
देश को निकालना होगा विकल्प
तेल व्यापारियों के अनुसार, अगर अक्टूबर तक रूस से तेल आयात में गिरावट आती है, तो भारत को अमेरिका, मिडल ईस्ट और अफ्रीका से वैकल्पिक ग्रेड की तरफ देखना पड़ सकता है।
जिससे कच्चे तेल की लागत बढ़ सकती है। जो लंबे समय के लिए देश की राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, अक्टूबर की खरीद पर अभी संवाद शुरू नहीं हुआ है।
लेकिन मार्केट में इस तनाव का असर तेजी से दिखाई देने लगा है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 67 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर हैं, लेकिन अगर देश की तेल खरीद में कमी आई, तो रूस को अपने तेल के लिए चीन या अन्य मार्केट की ओर अपने कदम बढ़ाने ही होंगे।
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सरकार की तरफ से नहीं कोई आदेश
रिफाइनरियों को रूस से कच्चा तेल खरीद बंद करने का आधिकारिक तौर पर भारत सरकार ने कोई आदेश नहीं दिया है। सरकार स्पष्ट कह चुकी है कि, देश की जरूरतों के हिसाब से हर संभव कदम उठाया जाएगा। कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
एनर्जी सिक्योरिटी हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ट्रंप के इस बढ़ते टैरिफ का पुरजोर विरोध करती है। हालांकि ब्लूमबर्ग ने पहले ही बताया था कि, रिफाइनरियों को गैर-रूसी कच्चा तेल खरीदने की योजना बनाने की तैयारी करनी होगी।
