

Indian Monsoon Cycle IMD Climate Change Research: भारत में बारिश के मौसम का चक्र अब पहले जैसा नहीं रहा है। मानसून के अपने समय पर ना आने की वजह से देश में गर्मी का समय लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के एक शोध में यह बात सामने आई है कि देश में मानसून का समय अब और लंबा हो गया है। शोध के अनुसार, मानसून अब अपनी निर्धारित समय-सीमा से पहले दस्तक दे रहा है और इसकी वापसी भी तय समय के काफी बाद हो रही है। यह निष्कर्ष वैज्ञानिकों द्वारा पिछले 120 वर्षों के आंकड़ों के विश्लेषण के बाद निकाला गया है।
मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने इस बदलाव के पीछे का सबसे प्रमुख कारण जलवायु परिवर्तन और वायुमंडलीय परिवेश में हो रहे बदलावों को बताया है। अध्ययन के अनुसार, पूर्व में वर्ष 1971 से 2000 के बीच जो मानसून की सामान्य तिथियां तय की गई थीं, वे अब वर्तमान की जलवायु परिस्थितियों से बदल गई हैं। पर्यावरण में हो रहे इन बदलावों की वजह से ही मानसून की समय-सारणी में दीर्घकालिक बदलाव आए हैं।
मौसम विभाग ने अब भविष्यवाणियों की सटीकता सुधारने के लिए मानसून की नई समय-सारणी तैयार की है। गौरतलब है कि अब तक जो तिथियां उपयोग में लाई जा रही थीं, वे वर्ष 1901 से 1940 के पुराने आंकड़ों पर आधारित थीं, जिन्हें केवल 149 केंद्रों से प्राप्त किया गया था। इसके विपरीत, नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने देशभर में फैले 569 केंद्रों से प्राप्त वर्ष 1971 से 2000 तक के वर्षा के आंकड़ों का उपयोग किया है। इन नई और अधिक विस्तृत तिथियों की मदद से अब मौसमी पूर्वानुमानों की सटीकता में काफी सुधार होगा।
सामान्य तौर पर, दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत जून के महीने में केरल से होती है। धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए करीब 15 जुलाई तक यह पूरे भारत में पूरी तरह सक्रिय हो जाता है। वहीं, मानसून की वापसी की प्रक्रिया सामान्यतः 15 सितंबर से शुरू होती है। हालांकि, यह शोध के परिणाम बताते हैं कि अब वर्षा ऋतु का यह पूरा चक्र पहले की तुलना में अधिक लंबा हो गया है।