पाकिस्तान को लगेगी मिर्ची? भारत काबुल में फिर खोलेगा दूतावास, अफगान विदेश मंत्री ने दिया बड़ा भरोसा

विदेश मंत्री S Jaishankar ने अफगानिस्तान के प्रतिनिधिमंडल का दिल्ली में गर्मजोशी से स्वागत करते हुए लगभग 4 साल के बाद फिर से काबुल में दूतावास के खोलने की बात की है। तमाम अन्य मसलों पर भी चर्चा हुई।
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगानिस्तान के प्रतिनिधिमंडल का दिल्ली में गर्मजोशी से स्वागत किया (फोटो- सोशल मीडिया)
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India Embassy Reopening in Afghanistan: अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के चार साल बाद, भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों में एक नया मोड़ आया है। अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी आठ दिवसीय ऐतिहासिक दौरे पर भारत में हैं। शुक्रवार को दिल्ली में उनकी मुलाकात भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से हुई। इस उच्चस्तरीय बैठक में सबसे बड़ा फैसला यह लिया गया कि भारत काबुल में अपने दूतावास को फिर से खोलेगा, जो दोनों देशों के बीच बदलते समीकरण का एक बड़ा संकेत है।

यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच रिश्ते तनावपूर्ण हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगानी प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि भारत अफगानिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि अफगान लोगों का भविष्य उन्हें खुद तय करना चाहिए और भारत इसमें उनका सहयोगी रहेगा, जो एक महत्वपूर्ण राजनयिक संदेश है।

अफगानिस्तान ने दिया दोस्ती का भरोसा

इस बैठक के दौरान अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने भारत के साथ दोस्ती को लेकर कई अहम बातें कहीं। उन्होंने विश्वास दिलाया कि अफगानिस्तान किसी भी सैन्य बल को अपनी जमीन का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ करने की इजाजत नहीं देगा। मुत्ताकी ने कहा कि अमेरिकी कब्जे के दौरान कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन अफगानिस्तान ने कभी भी भारत के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया। उन्होंने पिछले चार सालों में भूकंप जैसी आपदाओं के बाद भारत द्वारा दी गई मदद के लिए आभार जताते हुए कहा कि भारत एक करीबी दोस्त है जो मुश्किल समय में साथ खड़ा रहता है।

सुरक्षा और सहयोग का नया अध्याय

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की सुरक्षा के प्रति अफगानिस्तान की संवेदनशीलता की सराहना की। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के दौरान अफगानिस्तान के समर्थन को भी याद किया। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि आतंकवाद के हर रूप से लड़ने के लिए मिलकर प्रयास करना जरूरी है। यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग और व्यावहारिक साझेदारी को बढ़ाने पर भी जोर दिया ताकि आपसी समझ का उपयोग करके दोनों देशों के लिए नए अवसरों का फायदा उठाया जा सके।

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