Operation Brahma : 50 टन राहत सामग्री लेकर म्यांमार पहुंचे भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत
भारत की ओर से म्यांमार में भूकंप पीड़ितों की सहायता के लिए आईएनएस सतपुड़ा और सावित्री के जरिए भेजी गई राहत सामग्री मंगलवार सुबह म्यांमार प्रशासन को सौंप दी गई है। भारत लगातार म्यांमार सरकार के संपर्क में है।
- Written By: यतीश श्रीवास्तव
भारत की ओर से आईएनएस सतपुड़ा और सावित्री के जरिए म्यांमार पहुंचाई गई राहत सामग्री
नई दिल्ली: म्यांमार में भूकंप से आई तबाही के बाद से हालात संभल नहीं पा रहे हैं। हजारों गृहस्थियां तबाह हो गई हैं। स्थानीय प्रशासन और सरकार की ओर से राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। पड़ोसी देश की सहायता के लिए भारत भी आगे आया है। ऑपरेशन ब्रह्मा के जरिए म्यांमार में यहां से मदद पहुंचाई जा रही है। भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत आईएनएस सतपुड़ा और आईएनएस सावित्री 50 टन राहत सामग्री लेकर म्यांमार पहुंचे हैं।
म्यांमार के राजदूत से मिली जानकारी के मुताबिक नौसेना के युद्धपोतों से जो राहत सामग्री भेजी गई थी उसे म्यांमार प्रशासन के अधिकारियों को सौंप दिया गया। भारत ने पड़ोसी देश को आश्वासन दिया है कि वह इस मुश्किल घड़ी में हर संभव मदद के लिए तैयार है।
6 विमान दे रहे ऑपरेशन ब्रह्मा को अंजाम
म्यांमार भूकंप पीड़ितों को राहत सामग्री प्रदान करने के लिए भारतीय नौसेना और वायुसेना पूरी तरह से तत्पर है। भारत की ओर से अभी तक यांगून, नेपीडॉ और मांडले तक राहत सामग्री पहुंचाई जा चुकी है और ऑपरेशन को बड़े ही सिस्टमेटिक तरीके से अंजाम दिया जा रहा है। भारतीय नौसेना और वायुसेना के 6 जहाजों के जरिए ऑपरेशन पूरा किया जा रहा है। भारत लगातार म्यांमार के विदेश मंत्रालय के संपर्क में है।
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जरूरत पड़ने पर और राहत सामग्री भेजेगा भारत
भारत की ओर से 29 मार्च को भेजे गए नौसेना के जहाजों से राहत सामग्री सोमवार देर रात को म्यांमार पहुंच गई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि भारत हर तरह से म्यांमार की मदद के लिए साथ खड़ा है। पहले 15 टन और फिर 50 टन राहत सामग्री भेजी गई है। जरूरत पड़ने पर और मदद भेजी जाएगी।
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दो हजार से अधिक की गई है जान
म्यांमार में 29 मार्च को 7.7 तीव्रता के साथ भूकंप ने तबाही मचाई थी। हजारों घर और इमारतें एक ही झटके में जमींदोज हो गए थे। अब तक दो हजार से अधिक लोगों की जान जा चुकी है जबकि काफी संख्या में अभी भी लोग मलबे में फंसे हुए हैं। राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है।
