क्या है परमाणु अप्रसार संधि, भारत-पाक ने एक-दूसरे को परमाणु ठिकानों की लिस्ट क्यों सौंपी?
India Pakistan Nuclear Exchange: भारत और पाकिस्तान ने 1 जनवरी को अपने परमाणु प्रतिष्ठानों और संस्थानों की सूची डिप्लोमैटिक चैनलों के माध्यम से साझा की है. यह आदान-प्रदान 1988 के समझौते के तहत हुआ।
- Written By: अर्पित शुक्ला
सांकेतिक तस्वीर
India-Pakistan News: भारत और पाकिस्तान ने गुरुवार, 1 जनवरी को डिप्लोमैटिक चैनलों के जरिए अपने-अपने परमाणु ठिकानों और संस्थानों की सूची साझा की है। यह आदान-प्रदान दोनों देशों के बीच परमाणु ठिकानों और संस्थानों पर हमलों के निषेध से संबंधित समझौते के तहत किया गया। विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज जारी कर इस जानकारी की पुष्टि की है।
यह लिस्ट शेयरिंग उस समय हुई है जब दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय तनाव अपने चरम पर है। भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले साल मई में चार दिनों का युद्ध हुआ था। इसके पहले, 22 अप्रैल को पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हमला कर 26 लोगों की जान ले ली थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। इस हमले के बाद, भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में आतंकियों और उनके ठिकानों को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत निशाना बनाया था।
क्या है परमाणु अप्रसार संधि (NPT) समझौता?
यह समझौता 31 दिसंबर 1988 को हुआ था और 27 जनवरी 1991 से लागू हुआ। इसके तहत, भारत और पाकिस्तान हर कैलेंडर वर्ष के 1 जनवरी को उन परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं की जानकारी एक-दूसरे को देने के लिए बाध्य हैं, जो इस समझौते के दायरे में आती हैं। यह समझौता दोनों देशों को एक-दूसरे के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने से रोकता है। यह दोनों देशों के बीच परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का 35वां आदान-प्रदान है, और पहला आदान-प्रदान 1 जनवरी 1992 को हुआ था।
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बता दें कि 7 मई को भारत के हमले में पाकिस्तान के 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे। इसके बाद पाकिस्तान ने भी भारत पर हमला किया, जिसे भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने नाकाम कर दिया था। चार दिनों के बाद, 10 जून को भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर हुआ था। इस युद्ध ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।
इस समझौते का उद्देश्य क्या है?
यह समझौता भारत और पाकिस्तान, दो परमाणु-सशस्त्र पड़ोसी देशों के बीच विश्वास-निर्माण का एक अहम उपाय है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संघर्ष या संकट की स्थिति में दोनों देशों के परमाणु ठिकानों पर आकस्मिक या जानबूझकर हमलों का जोखिम कम हो सके। यह समझौता दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार के परमाणु संघर्ष को टालने के प्रयास के रूप में काम करता है, जिससे दोनों देशों के लिए सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
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समझौते में यह सुनिश्चित किया गया है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के परमाणु प्रतिष्ठानों जैसे परमाणु ऊर्जा संयंत्र, अनुसंधान रिएक्टर, ईंधन निर्माण इकाइयां, यूरेनियम संवर्धन सुविधाएं, पुनर्संसाधन इकाइयां और रेडियोधर्मी सामग्री के भंडारण स्थल पर किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई या हमले से बचें। यह प्रतिबद्धता उन क्षेत्रों की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है, जो न केवल रणनीतिक दृष्टि से अहम हैं, बल्कि पर्यावरण और मानव जीवन के लिए भी अत्यधिक संवेदनशील होते हैं।
Frequently Asked Questions
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Que: भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु ठिकानों की जानकारी क्यों साझा की जाती है?
Ans: यह आदान-प्रदान परमाणु ठिकानों और संस्थानों पर हमलों के निषेध के समझौते के तहत किया जाता है, ताकि दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़े और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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Que: परमाणु अप्रसार संधि (NPT) कब लागू हुई थी?
Ans: यह समझौता 31 दिसंबर 1988 को हुआ था और 27 जनवरी 1991 से लागू हुआ था।
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Que: भारत और पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों की सूची साझा करने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
Ans: इसका उद्देश्य दोनों देशों के परमाणु ठिकानों पर आकस्मिक या जानबूझकर हमलों के जोखिम को कम करना है, जिससे कोई परमाणु संघर्ष न हो।
