Explainer: भारत के स्वदेशी ड्रोन पर दुनिया की दिलचस्पी, अमेरिका, चीन और ईरान के ड्रोन से कितना अलग है KAL?
KAL Drone: रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान संघर्ष में ड्रोन युद्ध का बड़ा हथियार बन चुके हैं। भारत का स्वदेशी काल ड्रोन अपनी 1000 किमी रेंज और 200 किग्रा पेलोड क्षमता के साथ वैश्विक स्तर पर चर्चा में है।
- Written By: अक्षय साहू
इंडिया का काल ड्रोन (AI जनरेटेड इमेज)
India Kal Drone: इस समय दुनिया में दो बड़े युद्ध अमेरिका-ईरान और रूस-यूक्रेन के बीच चल रहा है। युद्ध में आमतौर पर देशों की सेना जमीन पर एक-दूसरे पर गोलियां और बम बरसाते हुए सामने वाले को हराने की कोशिश करते हैं। लेकिन 2026 में अमेरिका या ईरान युद्ध को जमीन पर नहीं आसमान में लड़ रही हैं और हवाई हमलों के जरिए क दूसरे के सैन्य ठिकानों को तबाह कर रही है। इसमें उनका सबसे बड़ा हथियार है ड्रोन।
आंकड़ों के मुताबिक, यूक्रेन ने रूस पर लगभग 10,000 ड्रोन हमलें किए हैं। जबकि रूस ने यूक्रेन पर सिर्फ 2026 में 1 लाख से भी ज्यादा ड्रोन से हमलें किए हैं। अमेरिका- ईरान युद्ध में भी ड्रोन्स का जमकर इस्तेमाल हुआ है। खासकर ईरान ने मिडिल ईस्ट देशों के ऑयल रिफाइनरी और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए ड्रोन हमलों का सहारा लिया है। इससे साफ समझ आता है कि ड्रोन्स अब जंग की दिशा और दशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसी बीच भारत के ‘काल’ ड्रोन दुनियाभर में चर्चा का विषय बन हुए हैं। आइए आपको बताते है कि दुनिया के किन देशों के पास सबसे शक्तिशाली ड्रोन है? भारत के काल ड्रोन को लेकर इतनी चर्चा क्यों हो रही है?
क्या होता है ड्रोन स्वार्म?
स्वार्म ड्रोन का मतलब है कि कई ड्रोन एक साथ मिलकर एक मिशन को अंजाम दें। ये अलग-अलग दिशाओं से लक्ष्य की ओर बढ़ सकते हैं और एक-दूसरे के साथ तालमेल बना सकते हैं। एयर डिफेंस सिस्टम के लिए ऐसी स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। एक साथ बड़ी संख्या में ड्रोन आने पर सभी को रोकना मुश्किल हो जाता है। महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल करना भी आर्थिक रूप से भारी पड़ सकता है।
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ड्रोन स्वार्म हमलों ने बदली युद्ध की दिशा (AI जनरेटेड इमेज)
यूक्रेन ने साबित की ड्रोन की उपयोगिता
यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने ड्रोन की ताकत को दुनिया के सामने रखा है। छोटे और सस्ते ड्रोन से लेकर लंबी दूरी तक हमला करने वाले सिस्टम तक, इनका इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। रडार, सैन्य वाहन, कमांड सेंटर, गोला-बारूद के ठिकाने और तेल भंडार जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों को ड्रोन से निशाना बनाया गया है। इससे सेनाओं की रणनीति में बड़ा बदलाव आया है।
यूक्रेन ने दुनिया को दिखाई ड्रोन की ताकत (सोर्स- सोशल मीडिया)
ड्रोन के मामले में अमेरिका सबसे आगे
अमेरिका को सैन्य ड्रोन तकनीक में दुनिया के सबसे मजबूत देशों में गिना जाता है। उसके पास निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने, समुद्री गश्त और हमले के लिए कई तरह के ड्रोन हैं। अमेरिकी ड्रोन की बड़ी ताकत उनके सेंसर और संचार सिस्टम हैं। इनमें हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे, थर्मल सेंसर, रडार और सुरक्षित डेटा लिंक का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे ऑपरेशन ज्यादा प्रभावी बनता है।
अमेरिकी सेना के पास हैं कई हाई टेक ड्रोन (सोर्स- सोशल मीडिया)
अमेरिकी सैन्य ड्रोन की एक खासियत यह भी है कि कई सिस्टम लंबी दूरी के संचार नेटवर्क से जुड़े होते हैं। कुछ ड्रोन को सैटेलाइट संचार के जरिए हजारों किलोमीटर दूर से नियंत्रित किया जा सकता है। अमेरिका की असली ताकत सिर्फ उसके ड्रोन नहीं हैं। उसके पास सैटेलाइट, लड़ाकू विमान, मिसाइल, नौसेना और खुफिया नेटवर्क का बड़ा सिस्टम है, जो ड्रोन को ज्यादा प्रभावी बनाता है।
ड्रोन निर्माण में अपनी ताकत बढ़ा रहा चीन
चीन ने पिछले कुछ सालों में ड्रोन निर्माण के क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है। उसके पास छोटे निगरानी ड्रोन से लेकर बड़े सशस्त्र ड्रोन तक कई विकल्प मौजूद हैं। चीन ड्रोन का निर्यात भी करता है, इसलिए उसकी तकनीक कई देशों तक पहुंची है। चीन लंबी दूरी, ज्यादा उड़ान समय और हथियार ले जाने की क्षमता वाले ड्रोन के साथ स्वार्म तकनीक पर भी तेजी से काम कर रहा है।
ईरान के शाहेद ड्रोन के सामने अमेरिका बेबस
ईरान के शाहेद ड्रोन ने भी दुनिया का ध्यान खींचा है। इनकी चर्चा खास तौर पर लंबी दूरी और कम लागत के कारण होती है। ऐसे ड्रोन बहुत महंगे और जटिल प्लेटफॉर्म नहीं होते, लेकिन बड़ी संख्या में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इससे दुश्मन की एयर डिफेंस व्यवस्था पर दबाव बढ़ता है। एक सस्ते ड्रोन को रोकने के लिए महंगी मिसाइल का इस्तेमाल करना आर्थिक चुनौती बन सकता है। अमेरिका और इजरायल के खिलाफ युद्ध में शाहेद ड्रोन ने अहम भूमिका निभाई।
अमेरिका के खिलाफ कारगर साबित हुए ईरान के शाहेद ड्रोन (सोर्स- सोशल मीडिया)
भारत के ‘काल’ ड्रोन की चर्चा क्यों?
इसी बदलते युद्ध के बीच भारत का स्वदेशी ‘काल’ ड्रोन चर्चा में है। इसे निजी क्षेत्र की कंपनी आईजी डिफेंस ने तैयार किया है। कंपनी के अनुसार, यह एक वन-वे अटैक ड्रोन है, जिसे मिशन पूरा करने के बाद वापस लौटने के बजाय लक्ष्य पर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी बताई गई रेंज करीब 1000 किलोमीटर है और यह लंबी दूरी के मिशन में इस्तेमाल हो सकता है।
दुनिया के दूसरे ड्रोन से अलग है भारत का काल ड्रोन (AI जनरेटेड इमेज)
‘काल’ ड्रोन की एक बड़ी खासियत इसकी लंबी उड़ान क्षमता बताई जाती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह करीब 7 से 8 घंटे तक हवा में रह सकता है। इसमें लगभग 200 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने की क्षमता बताई गई है। कंपनी के मुताबिक, इसमें कैमरे, थर्मल सेंसर, नेविगेशन सिस्टम और सुरक्षित डेटा लिंक जैसी तकनीकें भी शामिल हैं। हालांकि, इन क्षमताओं का वास्तविक प्रदर्शन परीक्षण और सैन्य इस्तेमाल से स्पष्ट होगा।
भारत के लिए क्यों जरूरी?
भारत की पश्चिमी सीमा पाकिस्तान और उत्तरी-पूर्वी दिशा में चीन से लगती है। इन सीमाओं पर पहाड़, रेगिस्तान और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां हैं। ऐसे में लंबी दूरी तक पहुंचने वाला ड्रोन सेना के लिए उपयोगी विकल्प बन सकता है। यह दुश्मन के इलाके में मौजूद महत्वपूर्ण ठिकानों की निगरानी कर सकता है और जरूरत पड़ने पर सैन्य लक्ष्य पर हमला करने की क्षमता रख सकता है।
भारत के काल ड्रोन के सामने अभी भी कई चुनौतियां (AI जनरेटेड इमेज)
हालांकि किसी ड्रोन की ताकत सिर्फ उसकी रेंज से तय नहीं होती। युद्ध क्षेत्र में उसे जीपीएस जैमिंग और इलेक्ट्रॉनिक हमलों का सामना करना पड़ सकता है। उसे सही रास्ता बनाए रखना, लक्ष्य की पहचान करना और सुरक्षित तरीके से जानकारी पहुंचाना भी जरूरी है। इसलिए ‘काल’ जैसे ड्रोन की वास्तविक क्षमता उसके सेंसर, नेविगेशन, संचार, इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा और लक्ष्य भेदने की क्षमता पर निर्भर करेगी।
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ड्रोन को लेकर भारत की चुनौतियां?
भारत के लिए अब चुनौती सिर्फ लंबी दूरी के ड्रोन बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें बड़े पैमाने पर तैयार करने की भी है। ऐसे सिस्टम पहाड़, रेगिस्तान, जंगल और मैदानी इलाकों में काम करने लायक होने चाहिए। उन्हें दिन और रात दोनों समय इस्तेमाल किया जा सके, यह भी जरूरी है। साथ ही, उनकी लागत इतनी होनी चाहिए कि जरूरत पड़ने पर बड़ी संख्या में इनकी तैनाती की जा सके।
