सनातन धर्म के लिए रानी अहिल्याबाई होल्कर का अमर योगदान, जानें कौन थीं अहिल्याबाई होल्कर
- Written By: नवभारत डेस्क
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सीमा कुमारी
नई दिल्ली: हर साल 31 मई को महारानी अहिल्याबाई होलकर की जयंती मनाई जाती है। इस बार इनकी 299 वीं जयंती मनाई जा रही है। उनको हमेशा से एक बहादुर, आत्मनिष्ठ, निडर महिला के रूप में याद किया जाता है। ये अपने समय की सर्वश्रेष्ठ योद्धा रानियों में से एक थीं, जो अपनी प्रजा की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहती थीं। इतना ही नहीं उनके शासन काल में मराठा मालवा साम्राज्य ने काफी ज्यादा नाम कमाया था। जनहित के लिए काम करने वाली महारानी ने कई हिंदू मंदिर का निर्माण भी करवाया था, जो आज भी पूजे जाते हैं।
अहिल्याबाई होल्कर एक ऐसी सशक्त महिला और रानी थी जिसका जीवन बहुत प्रेरणादायक रहा। महाराष्ट्र के एक छोटे से गाँव में जन्म लेने वाली अहिल्याबाई ने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया। अहिल्याबाई होलकर मालवा की रानी थी।
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एक महान योद्धा और कुशल तीरंदाज होने के साथ-साथ अहिल्याबाई दूरदर्शी और धार्मिक भी थी। उनके कार्यकाल में भारतीय संस्कृति को नया आयाम मिला। प्रतिवर्ष 31 मई को अहिल्याबाई होल्कर जयंती मनाई जाती हैं। आइए जानें अहिल्याबाई होल्कर जीवन परिचय और अहिल्याबाई होल्कर का इतिहास-
अहिल्याबाई होल्कर जीवन परिचय में सबसे पहले हम उनके बाल्यकाल के बारे में जानेंगे। 31 मई 1725 ईस्वी में जन्म लेने वाली अहिल्याबाई होल्कर ने मराठा साम्राज्य में अभूतपूर्व योगदान दिया। इनके पिता मान्कोजी शिंदे बहुत साधारण व्यक्तित्व के थे। पिता हमेशा अपनी पुत्री को आगे बढ़ने की शिक्षा देते थे। जिसका उनके जीवन पर गहरा प्रभाव भी रहा। इस काल में महिलाओं का पढ़ना-लिखना नहीं आता था और ना ही शिक्षा दी जाती थी लेकिन फिर भी मान्कोजी राव ने अपनी बेटी अहिल्याबाई को उचित शिक्षा दी।
मात्र 8 वर्ष की आयु में इनका विवाह खांडेराव होल्कर के साथ हुआ था। खांडेराव इंदौर के संस्थापक मल्हारराव होल्कर के पुत्र थे. सन 1745 ईस्वी में 20 वर्ष की आयु में इन्होंने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम मालेराव था। 3 वर्ष पश्चात् सन 1748 में अहिल्याबाई होल्कर ने मुक्ताबाई नामक लड़की को जन्म दिया।
अहिल्याबाई होल्कर ने अपने पति खांडेराव का मान-सम्मान कई गुना बढ़ा दिया था। क्योंकि अहिल्याबाई के पति खांडेराव के पिता मल्हारराव एक महान शासक थे तो उनके सानिध्य में धीरे-धीरे खांडेराव भी एक मजबूत सिपाही बनकर उभरे। इसमें उनकी पत्नी का अहम् योगदान था।
मल्हारराव ने ना सिर्फ अपने पुत्र को बल्कि पुत्रवधू को भी कामकाज सीखना शुरू कर दिया था। यह सब देखकर मल्हारराव बहुत प्रसन्न भी होते थे। हिन्दू संस्कृति के उत्थान और मंदिरों के पुर्निर्माण का कार्य भारत में सबसे ज्यादा किसी ने किया तो वह राजमाता अहिल्याबाई होल्कर थी। आज भी हिन्दू समाज उनके एहसानों तले दबा हैं। अपने जीवनकल में अहिल्याबाई ने मंदिर, धर्मशाला, सड़कें कुआँ, बावड़ियाँ,प्याऊ आदि का वृहद् स्तर पर निर्माण करवाया था। कोई भूखा ना सोए इसके लिए उन्होंने जगह-जगह अन्नक्षेत्रों का निर्माण भी करवाया।
कोलकत्ता से लेकर बनारस तक सड़क का निर्माण भी अहिल्याबाई ने करवाया था। इसके अलावा बनारस में अन्नपूर्णा माता का मंदिर, गयाजी में भगवान विष्णु जी का मंदिर बनवाया था। काशी, मथुरा, गया जी, अयोध्या, हरिद्वार, द्वारिका, जगन्नाथ, बद्रीनारायण और रामेश्वरम जैसे विश्वविख्यात और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों पर कई मंदिरों का निर्माण रानी अहिल्याबाई द्वारा करवाया गया।
