हाइड्रोजन और एलएनजी ट्रेन में क्या है असली फर्क? ₹25 लाख की सालाना बचत और जीरो प्रदूषण, जानिए दोनों का अंतर

Hydrogen Train vs LNG Train: भारत की दो नई ग्रीन ट्रेन हाइड्रोजन ट्रेन और एलएनजी ट्रेन ने पटरी पर दौड़ लगानी शुरू कर दी है। भारतीय रेलवे की हाइड्रोजन और LNG ट्रेनों में तकनीकी अंतर जानें।
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एलएनजी ट्रेन, हाइड्रोजन ट्रेनसौजन्य-IANS
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Highlights:

  • LNG और हाइड्रोजन ट्रेनें हरित तकनीक को बढ़ावा देने के लिए बहुत फायदेमंद हैं।

  • LNG और हाइड्रोजन दोनों ट्रेनों में काफी बड़ा अंतर है।

  • एक ट्रेन सालाना खर्च बचाती, जबकि दूसरी प्रदूषण कम करने में योगदान देती है।

Indian Railways Green Energy: देश की पहली हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन लॉन्च करने के दो महीने से कुछ ज्यादा समय बाद भारत ने अपने रेलवे नेटवर्क में एक और वैकल्पिक ईंधन प्रयोग को शामिल किया। 27 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के साबरमती से देश की पहली एलएनजी पावर्ड ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी।

पहली नजर में ये दोनों एक ही ग्रीन रेल पहल का हिस्सा लग सकते हैं, लेकिन तकनीकी रूप से वे काफी अलग हैं। हाइड्रोजन ट्रेन को जीरो टेलपाइप एमिशन वाली फ्यूल सेल ट्रेन के तौर पर डिजाइन किया गया है, जबकि एलएनजी ट्रेन एक डीजल ट्रेन है, जिसे एलएनजी और डीजल के मिश्रण से चलाने के लिए बदला गया है। इनके इस्तेमाल और भविष्य के विस्तार की योजनाएं भी अलग-अलग हैं।

हाइड्रोजन ट्रेन

हाइड्रोजन ट्रेन इंजन में हाई प्रेशर सिलेंडरों में जमा हाइड्रोजन को एक फ्यूल सेल में भेजा जाता है, जहां यह हवा से मिलने वाली ऑक्सीजन के साथ इलेक्ट्रोकेमिकल रिएक्शन करती है। इससे बनने वाली बिजली ट्रेन के ट्रैक्शन सिस्टम को चलाती है और इसका सीधा बाई प्रोडक्ट पानी की भाप होती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 जुलाई को लॉन्च की गई भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार और 8 पैसेंजर कोच हैं। दोनों पावर कार मिलकर 2,400 किलोवॉट की पावर देती हैं। हाइड्रोजन ट्रेन को जीरो टेलपाइप एमिशन वाली फ्यूल सेल ट्रेन के तौर पर डिजाइन किया गया है।

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हाइड्रोजन ट्रेनसौजन्य-IANS

हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन में खूबियां

जीरो एमिशन और पर्यावरण के अनुकूल

यह ट्रेन 'प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन' (PEM) फ्यूल सेल का उपयोग करके बिजली बनाती है, जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को मिलाया जाता है। इससे केवल भाप और गर्मी निकलती है, जिससे कोई कार्बन उत्सर्जन या धुआं नहीं होता है।

यात्रियों की अधिक क्षमता

दुनिया भर में चलने वाली आम हाइड्रोजन ट्रेनों में आमतौर पर 2 से 3 कोच होते हैं, जबकि यह ट्रेन 10 कोचों वाली है, जिसमें लगभग 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं।

गति और प्रदर्शन

इसमें 1,200 kW की दो पावर कारें लगी हैं। इसकी डिजाइन स्पीड 110 km/h है और जींद-सोनीपत रूट पर यह 75 km/h की गति से चलती है।

एलएनजी ट्रेन

एलएनजी ट्रेन का काम करने का तरीका ज्यादा पारंपरिक है। एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस एक हाइड्रोकार्बन ईंधन है। साबरमती प्रोजेक्ट में दो 1,400 एचपी ड्राइविंग पावर कारों का इस्तेमाल किया गया है, जिन्हें डुअल फ्यूल एलएनजी-डीजल सिस्टम में बदला गया है।

मौजूदा कॉन्फिगरेशन में एलएनजी डीजल की खपत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ले सकती है। इसलिए यह ट्रेन पयूल सेल से बिजली बनाने के बजाय इंटरनल कंबशन इंजन का इस्तेमाल करती है। अहमदाबाद में भारत की पहली LNG-संचालित यात्री ट्रेन शुरू की गई।

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LNG ट्रेन को अमित शाह ने दिखाई हरी झंडीसौजन्य-एक्स @AmitShah

LNG-संचालित यात्री ट्रेन में कई प्रमुख खूबियां

पर्यावरण के अनुकूल और कम उत्सर्जन

इसमें LNG डुअल-फ्यूल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है, जो डीजल की तुलना में कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर के उत्सर्जन को काफी कम करता है। इससे पर्यावरण और कार्यक्षमता के मामले में लगभग तीन गुना अधिक लाभ मिलता है।

लंबी दूरी तक चलने की क्षमता

इसके हर ड्राइविंग पावर कार (DPC) में 2,200 लीटर का LNG टैंक लगा है। इससे ट्रेन एक बार ईंधन भरने पर 1,600 किमी से 2,200 किमी तक का सफर तय कर सकती है, जिससे बार-बार ईंधन भरने की जरूरत काफी कम हो जाती है।

डुअल-फ्यूल की सुविधा

ईंधन की उपलब्धता के आधार पर, यह ट्रेन बिना किसी परेशानी के LNG और डीजल के बीच स्विच कर सकती है। इस दौरान इंजन की ताकत, विश्वसनीयता या यात्री सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ता है।

आर्थिक बचत

इससे डीजल की खपत और ईंधन के आयात में कमी आती है। अनुमान है कि इससे हर DPC पर सालाना लगभग ₹25 लाख की परिचालन लागत (ऑपरेशनल कॉस्ट) की बचत होती है।

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LNG ट्रेनसौजन्य-एक्स @AmitShah
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हाइड्रोजन और एलएनजी ट्रेन में मूलभूत तकनीकी अंतर

हाइड्रोजन ट्रेन और एलएनजी ट्रेन में मूलभूत अंतर भी है। भारत की हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन और LNG पैसेंजर ट्रेन के बीच मुख्य अंतर उनकी प्रोपल्शन तकनीक, पर्यावरण पर प्रभाव और परिचालन लक्ष्यों में हैं।

तकनीक और ईंधन

हाइड्रोजन ट्रेन में 'प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन' (PEM) फ्यूल सेल का उपयोग होता है, जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को मिलाकर ट्रेन के अंदर ही बिजली पैदा करता है।

इसके विपरीत, LNG ट्रेन में 'डुअल-फ्यूल' सिस्टम का इस्तेमाल होता है, जिसमें डीजल के साथ लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) को मिलाकर DEMU पावर कारों में इस्तेमाल किया जाता है।

उत्सर्जन

हाइड्रोजन ट्रेन से किसी भी तरह का हानिकारक उत्सर्जन नहीं होता (जीरो टेलपाइप एमिशन)। यह केवल पानी की भाप और गर्मी छोड़ती है।

LNG ट्रेन, शुद्ध डीजल की तुलना में कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर के उत्सर्जन को काफी हद तक कम कर देती है, हालांकि यह पूरी तरह से 'जीरो-एमिशन' (शून्य उत्सर्जन) नहीं है।

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हाइड्रोजन ट्रेनसौजन्य-IANS

बहु-स्तरीय सुरक्षा

इसमें अंतरराष्ट्रीय 'डिफेंस-इन-डेप्थ' फ्रेमवर्क का इस्तेमाल किया गया है। इसमें लगातार काम करने वाले हीट, धुआं और हाइड्रोजन-लीक सेंसर, ऑटोमैटिक इमरजेंसी शट-ऑफ वाल्व और निरंतर वेंटिलेशन की सुविधा है।

स्वदेशी इंजीनियरिंग

इसे पूरी तरह से भारत में ही डिजाइन और तैयार किया गया है। इसमें RDSO, ICF और मेधा सर्वो ड्राइव्स का योगदान है।

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हाइड्रोजन ट्रेनसौजन्य-IANS

क्षमता और दक्षता

हाइड्रोजन ट्रेन 10 कोच वाली एक उच्च क्षमता वाली ट्रेन है, जिसे लगभग 2,600 यात्रियों के लिए बनाया गया है और इसकी डिजाइन स्पीड 110 किमी/घंटा है।

LNG ट्रेन का मुख्य उद्देश्य ईंधन की लागत को कम करना है, जिससे प्रति पावर कार सालाना लगभग ₹25 लाख की बचत होती है और यह एक बार ईंधन भरने पर 1,600 से 2,200 किमी तक की दूरी तय कर सकती है।

ये दोनों ट्रेनें हरित तकनीक को बढ़ावा देने और प्रदूषण मुक्त भारत बनाने के लिए बहुत फायदेमंद हैं। एक ट्रेन सालाना खर्च बचाने में मदद करती है, जबकि दूसरी प्रदूषण कम करने में योगदान देती है। दोनों ही ट्रेनों को अपने-अपने फायदे है।

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