भाइयों के बीच संपत्ति नहीं, बांटी जाती है पत्नी! हिमाचल प्रदेश के इन गांवों में है अजीब प्रथा
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और किन्नौर जिले में पहले एक ऐसी प्रथा थी, जहां भाइयों के बीच घर-जमीन का नहीं पत्नी का बंटवारा होता था। माना जाता है कि ऐसा इसलिए होता था ताकि घर की संपत्ति घर में रहे और भाइयों के बीज बंटवारा न हो। इतनी ही नहीं इस दौरान जो बच्चे जन्म लेते थे उन्हें भी भाइयों के बीच बांटा जाता था।
- Written By: मृणाल पाठक
बहुपति प्रथा
शिमला: हिमाचल प्रदेश अपनी खूबसूरती के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां की खूबसूरती हमेशा लोगों का मन मोह लेती है। साथ ही हिमाचल अपनी कई तरह की परंपराओं के लिए भी फेमस है। जितनी यहां की सुंदरता की बात की जाती है, उतनी ही यहां की अनोखी संस्कृति भी प्रसिद्ध है।
आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी ही परंपरा के बारे में, जिसे जानकर आपके होश उड़ जाएंगे। इस परंपरा को जानकर आपको महाभारत के पांडवों की याद आ जाएगी। जहां पांच भाइयों ने द्रौपदी से शादी की थी। हालांकि उनकी शादी के पीछे की वजह कुछ और थी, लेकिन हिमाचल के सिरमौर और किन्नौर जिले में भी कुछ ऐसा ही देखने मिलता है, जिसके पीछे का कारण अपनी संपत्ति और जमीन को बचाना है।
सभी भाइयों की एक पत्नी
दरअसल, हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और किन्नौर जिले में एक प्रथा थी, जहां एक महिला शादी तो परिवार के बड़े भाई से करती थी, लेकिन पति उसके सारे भाई बन जाते थे। ऐसा इसलिए होता था क्योंकि वहां के लोगों का सोचना यह रहता था कि ऐसा करके वह अपनी जमीन-घर का बंटवारा रोक सकते हैं। हालांकि अब यह प्रथा लगभग बंद हो चुकी है।
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जोड़ीदारां यानी जॉइंट शादी की प्रथा
सिरमौर और किन्नौर जिलों में रह रही यह महिलाएं जोड़ीदारां यानी जॉइंट शादी में रहने वाली कहलाती हैं। इन जिलों में ज्यादातर ऐसे ही घर मिलेंगे, जहां यह रीत चली आ रही है। हम इसे प्रथा न कहते हुए वहां के लोगों की मजबूरी कह सकते हैं, क्योंकि घर में ज्यादा सुख संपत्ति न होने की वजह से यहां की महिलाएं ऐसा करने पर मजबूर होती हैं।
ऐसी होती है दिनचर्या
वहीं जब बात इनके दिनचर्या की आती है तो पूरा परिवार सामान्य जीवन ही जिता है। कभी भी किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आती, क्योंकि महिलाएं अपनी जीवन इन्हीं चीजों पर न्योछावर कर चुकी होती हैं। इनके शारीरिक संबंध भी बारी बारी के हिसाब से बनते हैं। जैसे जब एक भाई कमरे में होता है, उस समय दूसरा भाई वहां नहीं आता।
बच्चों का भी होता है बंटवारा
अब बच्चों की बात करें तो उनके साथ भी कुछ ऐसा ही होता था, उन्हें भी भाइयों के बीच बांट दिया जाता था। यह भी आपसी सहमति से होता था। मां तो हर बच्चों की होती थी, लेकिन उनके पिता अलग-अलग होते हैं।
शिक्षा से दूर भागी प्रथा
हालांकि, अब यह सब खत्म हो चुका है। लोग अब शिक्षित हो चुके हैं, जोड़ीदारां यानी जॉइंट शादी जैसी रीत अब चलन से बाहर हो गई है। शिक्षा बढ़ने की वजह से अब भाइयों के बीच औरतों का बंटवारा नहीं होता है और अब लोग इस प्रथा को दूर भी करने लगे हैं। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाय. एस. परमार ने इस प्रथा के बारे में अपनी किताब पॉलिएंड्री इन हिमाचल में वर्णन किया है।
