

Hantavirus Outbreak: हाल ही में पूरी दुनिया में उस वक्त हड़कंप मच गया जब अर्जेंटीना के उशुआइया से एक क्रूज शिप 'एमवी होंडियस' में अचानक दो महिलाओं की हंता वायरस से मौत हो गई। जैसे ही ये खबर सामने आई, दुनियाभर के लोग और सरकारें सकते में आ गईं। हर कोई बात से डरा है कि क्या ये नया वायरस कोरोना जितना ही खतरनाक तो नहीं। ये कैसे फैलता है? और इससे बचाव के क्या उपाय हैं? आइए आपको बताते हैं कि ये वायरस क्या है, कैसे फैलता है, ये कितना खतरनाक है, और क्या इसका कोई टीका उपलब्ध है या नहीं?
पिछले महीने अप्रैल में दझिण अमेरिकी देश अर्जेंटीना के उशुआइया से एक क्रूज शिप 'एमवी होंडियस' रवाना हुई थी। इस शिप में 23 देशों के 170 यात्री और 71 क्रू मेंबर्स सवार थे। ये शिप इन यात्रियों के लेकर अंटार्कटिका का चक्कर लगाने जा रहा था। लेकिन अचानक रास्ते में लोग बीमार पड़ने लगे। इसके बाद 11 अप्रैल को एक 70 वर्षीय डच व्यक्ति की मौत हो गई। इसके बाद 24 अप्रैल को उनकी पत्नी और 2 मई को एक और जर्मन महिला की मौत हो गई। इन मौतों ने शिप के लोगों को खौफ से भर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलाया हुआ कि इन सभी मौतों का कारण हंता वायरस है।
इस वायरस का नाम दक्षिण कोरिया की 'हंटन' नदी पर पड़ा है। यह मुख्य रूप से चूहों और गिलहरियों जैसे कुतरने वाले जानवरों (Rdents) के मल, मूत्र और लार में पाया जाता है। इंसान जब इनके संपर्क में आता है या संक्रमित हवा में सांस लेता है, तो यह शरीर में प्रवेश कर जाता है। इसके अलावा, संक्रमित व्यक्ति की लार, थूक या उसके साथ बर्तन साझा करने से भी यह फैल सकता है।
यह वायरस सबसे पहले 1950-53 के कोरियाई युद्ध के समय सामने आया था। उस समय कोरिया में तैनात संयुक्त राष्ट्र के सैनिक अचानक रहस्यमी बुखार का शिकार होने लगे थे। तब इसे कोरियन हेमोरेजिक फीवर कहा गया। कोरियाई युद्ध में 3,000 से अधिक सैनिक बीमार पड़े थे और करीब 250 सैनिकों की मौत हुई थी। इसके बाद 1970 के दशक में वैज्ञानिकों ने इसकी पहचान की और इसके बाद इसे हंता वायरस नाम दिया गया।
जानकारी के मुताबिक, यह वायरस शरीर के दो सबसे प्रमुख अंगों, फेफड़ों और किडनी को प्रभावित करता है।
फेफड़े: इनमें पानी भर जाता है जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है, इसे 'हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम' (HPS) कहते हैं।
किडनी: किडनी काम करना बंद कर देती है और शरीर के अंदर ब्लीडिंग शुरू हो सकती है, जिसे 'हेमोरेजिक फीवर विथ रिनल सिंड्रोम' (HFRS) कहा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इसके संपर्क में आने के बाद अगर इसके लक्षणों की समय पर न हो तो यह वायरस बेहद जानलेवा है और ये बहुत ही आसानी से फैल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हंता वायरस बहुत खतरनाक है क्योंकि इसकी चपेट में आने वाले 35-40% लोगों की मौत 6 हफ्तों के अंदर हो सकती है। इसके लक्षण दिखने में 1 से 8 हफ्तों का समय लग सकता है। सबसे बड़ी परेशानी की बात यह है कि इसके लक्षण सामान्य बीमारी की तरह ही हैं। जिसमें बुखार और सामान्य फ्लू जैसे संकेत मिलते हैं, लेकिन बाद में हालत तेजी से बिगड़ने लगती है।
फिलहाल हंता वायरस के लिए कोई विशेष दवा या वैक्सीन नहीं है। मरीजों को उनकी स्थिति के आधार पर ऑक्सीजन थेरेपी, वेंटिलेटर या किडनी खराब होने पर डायलिसिस पर रखा जाता है। कुछ मामलों में 'रिबाविरिन' नाम की एंटीवायरल दवा भी दी जाती है। हालांकि, शोधकर्ता लंबे समय से इसकी वैक्सीन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने फिलहाल इसे कोरोना जैसी महामारी मानने से इनकार किया है। WHO के विशेषज्ञों के अनुसार, जहाज पर यह संक्रमण काफी सीमित था और अब सभी यात्रियों को जांच के बाद सुरक्षित तरीके से उनके देशों में वापस भेजने की तैयारी की जा रही है।
क्रूज शिप पर 2 भारतीय क्रू मेंबर्स भी थे, लेकिन उनमें संक्रमण के कोई लक्षण नहीं मिले हैं। ICMR के अनुसार, भारत को फिलहाल इससे कोई सीधा खतरा नहीं है। हालांकि, भारत में पहले भी 2007, 2008 और 2016 में हंता वायरस के इक्का-दुक्का मामले सामने आ चुके हैं।