दिल्ली की ओर निकले जत्थे को किसान नेताओं ने बुलाया वापस, शंभू बॉर्डर पर करेंगे बैठक, इलाके में इंटरनेट सस्पेंड

हरियाणा सरकार ने शुक्रवार को अंबाला जिले के 11 गांव में मोबाइल इंटरनेट और एक साथ कई लोगों को संदेश भेजने की सुविधा ‘बल्क एसएमएस सेवा' को नौ दिसंबर तक निलंबित कर दिया।
किसानों का दिल्ली मार्च
शंभू बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों पर पुलिस ने किया आंसू गैस का इस्तेमाल
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नई दिल्ली: पंजाब और हरियाणा सीमा के शंभू बॉर्डर से किसानों का एक जत्था शुक्रवार को दिल्ली के लिए पैदल मार्च शुरू किया। हालांकि, कुछ दूरी के बाद ही पुलिस ने बैरिकेडिंग के जरिए उन्हें रोक दिया। इसके बाद कुछ किसान बैरिकेडिंग पर चढ़ गए तो सुरक्षाकर्मियों ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। हरियाणा पुलिस ने किसानों से आगे न बढ़ने को कहा और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू होने का हवाला दिया। अंबाला जिला प्रशासन ने जिले में पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के गैरकानूनी रूप से एकत्र होने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

किसान फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर केंद्र पर दबाव बनाने के लिए मार्च कर रहे हैं। विभिन्न किसान यूनियन के झंडे थामे कुछ किसानों ने घग्गर नदी पर बनाए गए पुल पर सुरक्षाकर्मियों द्वारा लगाई गई लोहे की जाली को नीचे धकेल दिया। हरियाणा सरकार ने शुक्रवार को अंबाला जिले के 11 गांव में मोबाइल इंटरनेट और एक साथ कई लोगों को संदेश भेजने की सुविधा ‘बल्क एसएमएस सेवा' को नौ दिसंबर तक निलंबित कर दिया।

हरियाणा के कई गांवों में इंटरनेट पर पाबंदी

वहीं, अंबाला के डंगडेहरी, लोहगढ़, मानकपुर, ददियाना, बड़ी घेल, लार्स, कालू माजरा, देवी नगर, सद्दोपुर, सुल्तानपुर और काकरू गांवों में शुक्रवार दोपहर को यह प्रतिबंध लगाया गया। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) एवं किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में इससे पहले पैदल दिल्ली कूच करने की घोषणा की थी। उनकी मांगों में फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और कई अन्य मांग शामिल हैं। सुरक्षा बलों द्वारा दिल्ली की ओर मार्च करने से रोके जाने के बाद वे 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं। जत्थे ने दोपहर एक बजे अपना मार्च शुरू किया, लेकिन कुछ मीटर दूरी पर उन्हें हरियाणा सरकार द्वारा लगाए गए बहुस्तरीय अवरोधकों से रोक दिया गया। ‘सतनाम वाहेगुरु' का जाप करते हुए और किसान यूनियन के झंडे एवं आवश्यक वस्तुएं लेकर मार्च कर रहे जत्थे ने शुरुआती स्तर के अवरोधक आसानी से पार कर लिए, लेकिन बाद में वे आगे नहीं बढ़ सके। कुछ किसानों ने लोहे की जाली एवं कंटीले तारों को हटा दिया और कुछ अन्य ने राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से लोहे की कीलें भी उखाड़ दीं।

किसान मार्च को लेकर कई अंबाला में स्कूल बंद

प्रदर्शनकारियों में शामिल एक व्यक्ति टिन की छत पर चढ़ गया, जहां सुरक्षा बल तैनात थे। उसे जबरन नीचे उतारा गया। शंभू बॉर्डर पर पानी की बौछारें करने की भी व्यवस्था की गई है। इससे पहले, अंबाला प्रशासन ने जिले के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों को शुक्रवार को बंद करने का आदेश दिया है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने मार्च शुरू करने वाले 101 किसानों को ‘मरजीवड़ा' (ऐसे लोग, जो किसी मकसद के लिए जान भी देने को तैयार हों) कहा था।  पंधेर ने हरियाणा प्रशासन द्वारा पैदल मार्च पर रोक लगाए जाने की आलोचना की। उन्होंने गुरुवार को कहा था कि अगर सरकार उन्हें पैदल मार्च निकालने से रोकती है, तो यह उनकी ‘‘नैतिक जीत'' होगी।

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