

Jantar Mantar Cockroach Janta Party Protest: राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है। इसी क्रम में 20 दिनों की भूख हड़ताल के बाद सोमवार को पार्टी ने संसद भवन तक मार्च निकाला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़प की खबरें सामने आईं। साथ ही, पुलिस ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में भी ले लिया।
हालांकि, सरकार के खिलाफ यह अकेला विरोध प्रदर्शन नहीं है। पिछले कुछ दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में केंद्र सरकार के खिलाफ कम से कम पांच अन्य बड़े प्रदर्शन भी हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शनों की संख्या क्यों बढ़ी है? इसके पीछे कौन-से प्रमुख मुद्दे और कारण हैं? आइए जानते हैं कि हाल के दिनों में देश के किन-किन हिस्सों में, किन मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुए।
सबसे पहले बात करते हैं दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन की। इस आंदोलन की शुरुआत 3 मई 2026 को आयोजित नीट परीक्षा के बाद हुई। परीक्षा समाप्त होने के कुछ ही समय बाद पेपर लीक के आरोप सामने आए, जिसके बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी नाराजगी देखने को मिली। इसी के साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज हो गई। इस मांग को लेकर सबसे मुखर भूमिका कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके समर्थकों ने निभाई।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत मई 2026 में एक व्यंग्यात्मक डिजिटल जनआंदोलन के रूप में हुई थी। इसकी पहल अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले भारतीय छात्र अभिजीत दीपके ने की थी। सोशल मीडिया के माध्यम से शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य राजनीतिक व्यवस्था और कुछ न्यायिक घटनाओं के खिलाफ विरोध दर्ज कराना तथा जनभावनाओं को अभिव्यक्ति देना था। 'कॉकरोच' को आंदोलन का प्रतीक बनाकर चलाया गया यह ऑनलाइन अभियान देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
हालांकि, शुरुआत में CJP मुख्य रूप से एक ऑनलाइन अभियान तक सीमित था, लेकिन नीट पेपर लीक विवाद ने इसे जमीनी आंदोलन का रूप लेने का अवसर दिया। वहीं, इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और आम लोगों तक पहुंचाने में लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सक्रिय भूमिका को निर्णायक माना गया।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन 20 जून से जारी था, लेकिन इस आंदोलन ने 28 जून को नया मोड़ तब लिया, जब प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का ऐलान किया। वांगचुक देश के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिनके विकसित किए गए कई उपकरणों का उपयोग भारतीय सेना भी करती है। ऐसे में उनके भूख हड़ताल पर बैठने से देशभर में इस आंदोलन को व्यापक चर्चा और समर्थन मिलने लगे।
इसके बाद सीजेपी ने घोषणा की कि 20 जुलाई को शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला जाएगा, जिसका नेतृत्व स्वयं सोनम वांगचुक करेंगे। इस तारीख का चयन भी रणनीतिक रूप से किया गया था, क्योंकि इसी दिन संसद के मानसून सत्र की शुरुआत होनी थी।
लगातार 20 दिनों तक भूख हड़ताल पर रहने के कारण सोनम वांगचुक की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को उनके स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया। इसके बाद 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस सादे कपड़ों में जंतर-मंतर पहुंची और सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले जाकर उनकी भूख हड़ताल समाप्त करवाई।
19 जुलाई की शाम तक जंतर-मंतर पर हजारों प्रदर्शनकारी जुट चुके थे। 20 जुलाई को सोनम वांगचुक की अनुपस्थिति में भी सीजेपी ने संसद की ओर मार्च शुरू किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पों की खबरें सामने आईं। हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए भेजा, ताकि गतिरोध का समाधान निकाला जा सके।
15 जुलाई 2026 को देश बचाओ मोर्चा के बैनर तले किसानों ने पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मोटरसाइकिल रैलियां निकालीं। ये रैलियां भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में आयोजित की गईं। किसानों का कहना है कि यह समझौता केवल आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है। इसका असर कृषि, डेयरी, उद्योग, डिजिटल व्यापार, सेवाओं, बौद्धिक संपदा अधिकार, ऊर्जा, निवेश और बाजार तक पहुंच जैसे कई अहम क्षेत्रों पर पड़ सकता है। उनका यह भी कहना है कि समझौते का पूरा मसौदा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे किसानों और दूसरे वर्गों में चिंता बढ़ रही है।
मोर्चे के नेतृत्व कर रहे सरवन सिंह पंढेर ने कहना है कि अमेरिका लंबे समय से भारतीय कृषि और डेयरी बाजार में ज्यादा पहुंच चाहता है। उनका कहना है कि अगर कृषि और डेयरी उत्पादों पर आयात शुल्क कम किया गया, तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान किसानों, डेयरी उत्पादकों और छोटे उद्योगों को होगा। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि वह किसी भी समझौते से पहले किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और देश की खाद्य व आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता दे।
इन रैलियों में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई किसान संगठनों ने हिस्सा लिया। सरवन सिंह पंढेर ने चेतावनी दी कि अगर सरकार किसानों की चिंताओं पर ध्यान नहीं देती और समझौते को आगे बढ़ाती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसी अभियान के तहत 21 जुलाई को नई दिल्ली में एक महा रैली आयोजित करने की घोषणा भी की गई है।
उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थानीय लोग सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन ऋषिकेश-भानियावाला राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-07) के चौड़ीकरण प्रोजेक्ट को लेकर हो रहा है। सरकार दो लेन वाली इस राजमार्ग को चार लेन करना चाहती है। सरकार का तर्क है कि इससे जाम की समस्या दूर होगी। इसके लिए सरकार ऋषिकेश के पास सात मोड़ के पास करीब 4,000 पेड़ काटना चाहती थी।
स्थानीय लोग इसका ही विरोध कर रहे हैं। लोग इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने से नाराज है वो लगातार सरकार के इस प्रोजेक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। बढ़ते विरोध के चलते प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी हुआ है। हालांकि, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बढ़ते विरोध को देखते हुए पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है। उन्होंने जनभावना को ध्यान में रखते हुए फिलहाल पेड़ न काटने का आदेश दिया है। उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले है। ऐसे में धामी नहीं चाहते कि उनकी सरकार के खिलाफ किसी भी प्रकार की कोई भी नकारात्मक नैरेटिव तैयार हो।
मध्यप्रदेश के छतरपुर में सैकड़ो आदिवासी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। आदिवासियों का यह प्रदर्शन सरकार की केन-बेतवा नदी परियोजना को लेकर है। इस परियोजना को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य के तहत शुरु किया गया है। इसका मकसद केन नदी के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी तक पहुंचाना है। जिससे देश के सबसे सुखा प्रभावित में से एक बुंदेलखंड के लोगों का पीने और सिंचाई के लिए पानी पहुंचाया जा सके।
छतरपुर के कूपी गांव के सैकड़ों लोग इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे है। ये लोग बराना नदी के किनारे पिछले 3 दिनों से सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। आदिवासी परियोजना लागू करने को लेकर कथित गड़बड़ी, जमीन छिनने, बहुत कम मुआवजा देने और सुरक्षित स्थान पर घर न मिलने की मांगों को लेकर 5 जुलाई से आमरण अनशन कर रहे थे। लेकिन रविवार की सुबह पुलिस ने प्रदर्शनकारियों का जबरदस्ती उठावा दिया और प्रदर्शन के नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर को हिरासत में ले लिया।
हालांकि, पुलिस ने किसी को भी हिरासत में लेने से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि बारिश के कारण बराना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया था और वहां प्रदर्शन करना सुरक्षित नहीं था। उन्होंने कहा कि खतरे को देखते हुए प्रदर्शनकारियों को हटाया गया है। पुलिस ने यह भी कहा कि अमित भटनागर को हिरासत में नहीं लिया गया है, बल्कि उन्हें आस्पताल ले जाया गया है ताकि उनका इलाजा करवाया जा सके।
इन विरोध प्रदर्शनों को देखकर लगता है कि देश में सरकार के खिलाफ विरोध का माहौल बना हुआ है। हालांकि सरकार लगातार इन समस्यों से निपटने की कोशिश कर रही है। जहां केंद्र सरकार ने सीजेपी से बात करने के लिए जेपी नड्डा को आगे किया है, वहीं ऋषिकेश में मुख्मंत्री धामी ने जनभावना का हवाला देते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण प्रोजेक्ट को ही स्थागित कर दिया है।