

Mallikarjun Kharge Birthday Special: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दिग्गज नेता मल्लिकार्जुन खरगे आज अपना 84वां जन्मदिन मना रहे हैं। 21 जुलाई 1942 को कर्नाटक के बीदर जिले में एक दलित परिवार के घर उनका जन्म हुआ था। हालांकि, उनका बचपन काफी संघर्षों में बीता है। साल 1948 में हैदराबाद के निजाम के रजाकारों द्वारा उनके घर में आग लगा दी गई। इस घटना उनकी मां और बहन की मौत हो गई थी, जबकि वह बाल-बाल बच गए थे। उस वक्त उनकी उम्र महज सात साल थी।
मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्य की राजनीति से अपने सियासी सफर की शुरुआत की थी। साल 1972 से 2008 तक वह कर्नाटक के गुरमितकल विधानसभा क्षेत्र से और 2008 से 2009 तक चित्तपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। इसके अलाव 1996 से 1999 तक उन्होंने कर्नाटक विधानसभा में नेता विपक्ष के तौर पर भी अपनी भूमिका निभा चुका है। वहीं, 2005 से 2008 तक कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और विभिन्न मुख्यमंत्रियों के अधीन कई विभागों में मंत्री के रूप में भी काम कर चुके हैं।
कर्नाटक की स्थानीय राजनीति में मंझे हुए खिलाड़ी के तौर पर अपनी पहचान बनाने के बाद मल्लिकार्जुन खरगे की 2009 में नेशनल पॉलिटिक्स में एंट्री हुई। पहली बार वह कर्नाटक के गुलबर्गा सीट से लोकसभा का चुनाव जीतकर दिल्ली पहुंचे। इसके बाद वे इसी सीट से 2014 में भी सांसद बने। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में खरगे को वहां से हार का सामना करना पड़ा। यूपीए 2 सरकार के दौरान उन्होंने 2013 से 2014 तक रेल मंत्री और 2009 से 2013 तक केंद्रीय मंत्रिमंडल में श्रम और रोजगार मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं।
इसके साथ 2018 से 2020 तक महाराष्ट्र के प्रभारी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव भी रहे। 2019 के लोकसभा चुनाव मिली हार के बाद पार्टी ने 2020 में उन्हें कर्नाटक से राज्यसभा भेजा। वहीं, 2022 में हुए कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में उन्होंने शशि थरूर को हराकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। उनकी अध्यक्षता में कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में 99 सीटें सफल रही। जिसके बदौलत 2014 में अपनी हार के बाद कांग्रेस पहली पहली बार आधिकारिक तौर पर विपक्ष की भूमिका में आई। खरगे को नेहरू और गांधी परिवार के काफी करीबियों में से एक माना जाता है।
कांग्रेस में जब भी कोई बड़ा संकट आया है, मल्लिकार्जुन खरगे हमेशा एक मजबूत चट्टान की तरह खड़े रहे हैं। कई बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की रेस में बाहर होने के बावजबूद भी वह उन्होंने कभी भी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा। यही कारण है कि गांधी परिवार ने हमेशा ही उनपर आंख बंदकर विश्वास किया है। साल 2022 में जब कांग्रेस अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही थी और गांधी परिवार से बाहर के व्यक्ति को अध्यक्ष बनाने की मांग जोर पकड़ रही थी, तब खरगे ही ऐसे नेता के रूप में उभरे जिन पर संगठन के हर धड़े और शीर्ष नेतृत्व की सहमति बनी।
कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद खरगे की असली परीक्षा विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की थी। तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और वामदलों जैसी परस्पर विरोधी विचारधाराओं और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं वाले दलों के बीच तालमेल बिठाना बेहद चुनौतीपूर्ण काम था। खरगे ने अपने लंबे राजनीतिक अनुभव, चर्चा और सहज व्यवहार के दम पर विपक्षी कुनबे को एकजुट रखने में सफलता पाई। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनके तीखे तंज और संयमित भाषा ने न सिर्फ सत्ता पक्ष को घेरा, बल्कि विपक्षी सहयोगियों के बीच भी उनका कद काफी ऊंचा कर दिया।
मौजूदा दौर में कांग्रेस का कोई भी बड़ा रणनीतिक या सांगठनिक फैसला खरगे की सहमति के बिना संभव नहीं दिखता। देश के सबसे वरिष्ठ दलित नेताओं में शामिल खरगे का कद कांग्रेस को सामाजिक न्याय के एजेंडे को मजबूती से आगे बढ़ाने में मदद करता है। कर्नाटक के गृह मंत्री से लेकर केंद्रीय रेल व श्रम मंत्री और संसद में नेता प्रतिपक्ष तक का उनका विशाल अनुभव संगठन के कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़ाव स्थापित करता है।
मल्लिकार्जुन खरगे ने गांधी परिवार के प्रति निष्ठा बनाए रखते हुए पार्टी के असंतुष्ट धड़ों को भी साधने और उन्हें मुख्यधारा में जोड़े रखने का बेहतरीन काम किया। दक्षिण भारत से आने के बावजूद हिंदी, अंग्रेजी, कन्नड़, मराठी और उर्दू जैसी बहुभाषी पकड़ के कारण वे उत्तर से दक्षिण तक पार्टी का मैसेज प्रभावी ढंग से पहुंचाते हैं।