आंदोलन से पहले CJP की बढ़ीं मुश्किलें! संसद मार्च को लेकर पुलिस ने शुरू की जांच, पड़ सकता आदोंलन पर असर?

CJP Protest: 10 अक्टूबर को सीजेपी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन की योजना बनाई है। इसी बीच दिल्ली पुलिस 20 जून को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा की जांच शुरू कर दी है।
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सीजेपी के अभिजीत दीपके, सौरभ दास व अन्यसोर्स-(सोशल मीडिया)
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Police Begin Probe Into CJP Protest:10 अक्टूबर को कॉकरेच जनता पार्टी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने का ऐलान कर चुकी है। सीजेपी के कार्यकर्ता और वालंटियर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं। इसी बीच सीजेपी के लिए एक बुरी खबर है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 20 जून को सीजेपी के संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस जांच शुरू कर दी है। इस संबंध में कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

क्राइम ब्रांच के सूत्रों ने बताया कि दिल्ली पुलिस की जांच का मुख्य फोकस 20 जुलाई को नई दिल्ली में हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर रहेगा। जांच में विशेष रूप से यह पता लगाया जाएगा कि हिंसा पूर्व नियोजित थी या सीजेपी द्वारा संसद की ओर मार्च का आह्वान किए जाने के दौरान आपराधिक तत्व प्रदर्शन स्थल में शामिल हो गए थे।

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20 जून के मार्च से जुड़े 17 FIR रद्द

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दिल्ली पुलिस हिंसा से संबंधित 17 FIR पहले ही रद्द कर चुकी है। अब दिल्ली क्राइम ब्रांच पुलिसकर्मियों पर हमले, तोड़फोड़ और पुलिस वाहनों समेत सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी हिंसा की विशेष रूप से जांच करेगी।

20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी इक्ट्ठा हुए थे। करीब 30 हजार लोग सड़कों पर उतरे और पेपर लीक तथा परीक्षाओं से जुड़ी अन्य अनियमितताओं पर कार्रवाई की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया। स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई।

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दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच ने शुरू की जांच

इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस की खुफिया व्यवस्था की समीक्षा की गई। अधिकारियों का मानना था कि प्रदर्शनकारियों की संख्या, उनकी लामबंदी और विभिन्न संगठनों की भूमिका को लेकर पुलिस के पास पहले से पर्याप्त और सटीक जानकारी नहीं थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच को निर्देश दिया गया कि वह केवल प्रदर्शन के स्थान और अनुमानित भीड़ की जानकारी जुटाने के बजाय अधिक विस्तृत और उपयोगी खुफिया सूचनाएं तैयार करे।

हालांकि, सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों के संबंध में दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया था। अदालत ने निर्देश दिया था कि देशभर में इसी तरह के मामलों में आगे कार्रवाई या जांच नहीं की जाएगी।

एजेंसी इनपुट के साथ।

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