रिहाई के बाद अभिजीत दीपके ने कहा कि दोनों नेताओं के लौटने पर आगे की रणनीति बनेगी।
जंतर-मंतर पर कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश के मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका न्यायिक हिरासत में हैं।
सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर ‘सीजेपी 2.0’ आंदोलन शुरू किया है।
CJP Founder Abhijeet Dipke Strategy: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके को शनिवार को रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस की हिरासत से बाहर आने के बाद उन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका के जेल से बाहर आने के बाद पार्टी के सभी नेता एक साथ बैठकर आगे की रणनीति तय करेंगे। सीजेपी के ये दोनों प्रमुख चेहरे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। उन्हें जंतर-मंतर में कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश करने के मामले में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
अभिजीत दिपके ने रविवार को कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका की वापसी के बाद सभी लोग मिलकर आगे की रणनीति बनाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों में हुई गिरफ्तारियों और हिरासत की घटनाओं के जरिए आंदोलन को डराने की कोशिश की जा रही है।
दिपके ने कहा, “हम न तो डरेंगे और न ही पीछे हटेंगे। यह लंबी लड़ाई है और हम इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।” उन्होंने उम्मीद जताई कि सौरव दास और आशुतोष रांका को भी रविवार को रिहाई मिल जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि वह कुछ कानूनी मुद्दों पर चर्चा करने जा रहे हैं।
इससे पहले 13 अक्टूबर को सीजेपी के 14 कार्यकर्ता जंतर-मंतर पहुंचे थे। इनमें सौरव दास और आशुतोष रांका भी शामिल थे। पुलिस का आरोप है कि जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने और वहां भारी बैरिकेडिंग होने के बावजूद प्रदर्शनकारी एक निजी परिसर के रास्ते अंदर पहुंचे थे।
इस मामले में कनॉट प्लेस और संसद मार्ग पुलिस थानों में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए। इसके बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर अभिजीत दिपके ने अपने आंदोलन को ‘सीजेपी 2.0’ नाम दिया था। हालांकि, हालिया पुलिस कार्रवाई और प्रमुख नेताओं की हिरासत के बाद आंदोलन की आगे की दिशा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
शुक्रवार को दिपके को दिल्ली के झंडेवालान स्थित अपने घर से निकलने के बाद हिरासत में लिया गया था। वह कनॉट प्लेस में सीजेपी के ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें 10 अक्टूबर को दिए गए शांति बॉन्ड का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
अब सीजेपी के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं। दिपके के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रांका के बाहर आने के बाद ही आंदोलन की आगे की रणनीति पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।