चंडीगढ़ में कांग्रेस ने केजरीवाल से मिलाया हाथ, मेयर चुनाव में BJP से है कांटे की टक्कर

Chandigarh Mayor Election: चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए AAP और कांग्रेस ने गठबंधन कर लिया है। मेयर पद AAP को, जबकि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद कांग्रेस को मिले हैं।
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राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल (Image- Social Media)
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Chandigarh Mayor Election 2026: चंडीगढ़ में मेयर चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। 29 जनवरी को मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों के लिए मतदान होगा। बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अपनी-अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीति बना रही हैं। इसी बीच कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने गठबंधन करने का फैसला किया है। दोनों दलों ने मिलकर चुनाव लड़ने पर सहमति जता दी है।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस और AAP के बीच पिछले कई दिनों से गठबंधन को लेकर बातचीत चल रही थी, हालांकि दोनों पक्षों के कुछ नेता इस साझेदारी को लेकर असहज थे। बाद में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी की मध्यस्थता से दोनों दलों में सहमति बन गई। इसके बाद यह साफ हो गया कि इस बार भी विपक्ष साझा रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरेगा।

चुनावी फार्मूला तय

मंगलवार (20 जनवरी) को चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस और AAP ने गठबंधन का औपचारिक ऐलान किया। कांग्रेस अध्यक्ष लक्की ने कहा कि चुनावी फार्मूला तय हो चुका है और AAP नेताओं के साथ सभी चर्चाएं पूरी हो गई हैं। उन्होंने बताया कि चुनाव लड़ने को लेकर पदों के बंटवारे पर भी सहमति बन गई है।

मेयर पद पर AAP का उम्मीदवार

गठबंधन समझौते के तहत मेयर पद पर आम आदमी पार्टी अपना उम्मीदवार उतारेगी, जबकि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर की दोनों सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशी होंगे। दोनों दल एक-दूसरे के उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे। पार्टियों का कहना है कि बीजेपी को रोकने के लिए यह गठबंधन जरूरी है। बुधवार सुबह गठबंधन उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जाएंगे, जिसके बाद नामांकन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। कांग्रेस और AAP के साथ आने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

दोनों में कांटे की टक्कर

चंडीगढ़ नगर निगम में कुल 35 पार्षद हैं और मेयर पद जीतने के लिए 19 वोटों की जरूरत होती है। बीजेपी के पास सबसे ज्यादा 18 पार्षद हैं। वहीं AAP के पास 11 और कांग्रेस के पास 7 वोट हैं, जिनमें एक वोट सांसद मनीष तिवारी का होगा। इस तरह AAP और कांग्रेस के कुल वोट 18 बनते हैं। 35 सदस्यीय निगम में बहुमत के लिए 19 वोट जरूरी होने के कारण बीजेपी और कांग्रेस-AAP गठबंधन दोनों को ही एक अतिरिक्त वोट की दरकार है। ऐसे में इस बार का चुनावी मुकाबला बेहद कांटे का माना जा रहा है।

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