केंद्र सरकार ने मराठी सहित इन 5 भाषाओं को दिया क्लासिकल लैंग्वेज का दर्जा, यहां देखें पूरी लिस्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में 5 भारतीय भाषाओं क्लासिकल भाषा का दर्जा दिया गया है। इस फैसले से भारतीय भाषाओं को और मजबूती मिलेगी।
- Written By: विकास कुमार उपाध्याय
Narendra Modi | ANI
नई दिल्ली : भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने और उन्हें संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में गुरुवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में 5 भाषाओं को क्लासिकल लैंग्वेज का दर्जा देने का फैसला लिया गया। इन भाषाओं में बांग्ला, मराठी, पाली, प्राकृत और असमिया शामिल हैं। इस ऐतिहासिक निर्णय से इन भाषाओं की प्रतिष्ठा बढ़ेगी और इनके अध्ययन एवं अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा भारतीय भाषाओं पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने बताया, “आज की कैबिनेट बैठक में मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बांग्ला भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया है। यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का एक अहम कदम है।”
इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट भी किया है। पोस्ट करते हुए मोदी ने लिखा “मराठी भारत का गौरव है।” इस अभूतपूर्व भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने पर बधाई। यह सम्मान हमारे देश के इतिहास में मराठी के समृद्ध सांस्कृतिक योगदान को मान्यता देता है। मराठी हमेशा से भारतीय विरासत की आधारशिला रही है। मुझे यकीन है कि शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने से और भी कई लोग इसे सीखने के लिए प्रेरित होंगे।
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यहां देखें पीएम मोदी का एक्स पोस्ट
Marathi is India’s pride. Congratulations on this phenomenal language being accorded the status of a Classical Language. This honour acknowledges the rich cultural contribution of Marathi in our nation’s history. Marathi has always been a cornerstone of Indian heritage. I am… — Narendra Modi (@narendramodi) October 3, 2024
शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने के बाद इन भाषाओं को विभिन्न शैक्षणिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में विशेष महत्व मिलेगा। इसके साथ ही इन भाषाओं के संरक्षण, अध्ययन और विकास के लिए विशेष फंड भी उपलब्ध कराया जाएगा। यह कदम देश की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को सहेजने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
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