यह जमीन करीब 65 एकड़ के करीब है। नारेगांव में 54 एकड़, पडेगांव में 7 एकड़, चिकलथाना में 1.5 एकड़, कांचनवाडी में 2.5 एकड, हर्सूल में 20 गुंठा जमीन शामिल है। यहां पड़े कचरे पर बायोमायनिंग प्रक्रिया पूरी की गई तो यह जमीन मनपा प्रशासन को इस्तेमाल को मिलेगी। उधर, बायोमायनिंग प्रक्रिया के बारे में उपायुक्त जाधव ने बताया कि प्रक्रिया करते समय गीला व सूखा कचरा अलग-अलग किया जाता है।