देश में कुछ भी होता है तो एक्टर्स नहीं बोलते, लेकिन मैं वैसी नहीं हूं; भूमि पेडनेकर ने बॉलीवुड को दिखाया आईना

Bhumi Pednekar In Navbharat Conclave: भूमि पेडनेकर ने कहा कि बहुत सारे एक्टर वोकल नहीं होते हैं। ऐसे बहुत लोग हैं, जिन्हें लगता है कि देश में जो हो रहा है होने देते हैं। यह हमारी जिम्मेदारी नहीं है।
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(नवभारत कॉन्क्लेव के मंच पर बॉलीवुड एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर)
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Bollywood Actress Bhumi Pednekar in Navbharat Conclave 2026: हाल ही में दिल्ली में आयोजित ‘नवभारत कॉन्क्लेव’ में बॉलीवुड अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने ‘विकसित भारत 2047’ के विजन पर अपने विचार रखे। भूमि ने कहा कि एक युवा भारतीय और एक कलाकार होने के नाते वे देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को बहुत गंभीरता से लेती हैं। उनके अनुसार, कलाकारों के पास ‘क्राफ्ट’ के रूप में एक बहुत शक्तिशाली जरिया है जिससे वे करोड़ों लोगों तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं।

इसी कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री के बहुत सारे एक्टर वोकल नहीं होते हैं। बहुत से एक्टर्स ऐसे हैं, जिन्हें लगता है कि देश में जो हो रहा है होने देते हैं। यह हमारी जिम्मेदारी नहीं है। लेकिन मैं वैसी नहीं हूं और ऐसी सोच से बिलकुल भी सहमत नहीं हूं। मुझे लगता है कि ये हम सभी की जिम्मेदारी है।

मैं भारत के विकास में योगदान करती रहूंगी

नवभारत कॉनक्लेव के मंच से बोलते हुए भूमि पेडनेकर ने कहा कि मैं इस देश की नगारिक हूं और इस देश में कुछ भी होता है उसका सीधा असर मुझ पर होता है, और जो मेरे एक्शन हैं उसका डायरेक्ट असर देश पर पड़ता है। उसी जिम्मेदारी को मैंने थोड़ी गंभीरता से लिया है। मैं सौभाग्यशाली हूं कि यह मौका मुझे मिला है। मैं भारत के विकास में अगर कुछ भी योगदान कर सकती हूं तो करती रहूंगी।

bhumi pednekar with navbharat group editor

‘आधी आबादी के बिना तरक्की मुमकिन नहीं’

नवभारत कॉन्क्लेव में अपनी बात करते हुए उन्होंने न केवल फिल्मों, बल्कि स्वास्थ्य, पर्यावरण और समाज की सोच को बदलने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधी आबादी को सशक्त किए बिना तरक्की मुमकिन नहीं है। भूमि पेडनेकर ने देश की आर्थिक प्रगति पर बात करते हुए एक बहुत ही पते की बात कही।

‘मल्टी-ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का मौका’

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की एक तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है और हमारे पास अगले 21 सालों में एक मल्टी-ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनने का मौका है, लेकिन इस लक्ष्य को हम तब तक हासिल नहीं कर सकते जब तक हम अपनी आधी आबादी, यानी महिलाओं को नजरअंदाज करेंगे।

‘महिलाओं की भागीदारी नहीं, जरूरत’

फिल्म अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल सम्मान की बात नहीं, बल्कि आर्थिक जरूरत भी है। उन्होंने स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के आपसी रिश्ते को समझाते हुए कहा कि जब तक औरतों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और स्वच्छता (सैनिटेशन) नहीं मिलेगी, तब तक वे वर्कफोर्स का हिस्सा नहीं बन पाएंगी।

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