BD Jatti Death Anniversary: नगर निगम सदस्य से कार्यवाहक राष्ट्रपति तक, कुछ ऐसा रहा बीडी जत्ती का अनोखा सफर
BD Jatti Biography: 'बासप्पा दानप्पा जत्ती' की पुण्यतिथि पर आइए जानते है उनके नगर निगम सदस्य से लेकर मुख्यमंत्री, राज्यपाल, उपराष्ट्रपति और कार्यवाहक राष्ट्रपति बनने तक के प्रेरणादायक राजनीतिक सफर को
- Written By: स्निग्धा श्रीवास्तव
बासप्पा दानप्पा जत्ती (सोर्स- सोशल मीडिया)
Political Journey of BD Jatti: वैसे तो हमारे देश के नेता अपने पूरे राजनीति काल में एक ही संवैधानिक पद पर कार्य करते है। लेकिन क्या आपने किसी ऐसे नेता का नाम सुना है जो देश के सारे संवैधानिक पदों यानि नगर निगम से लेकर मुख्यमंत्री, राज्यपाल से लेकर कार्यवाहक राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद पर चुके है। अगर आपका जवाब है नहीं तो….आइए हम आपको बताते है एक ऐसे भारतीय नेता के बारें जिसने नगर निगम, सीएम और राज्यपाल से लेकर कार्यवाहक राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति के संवैधानिक पद कार्य कर देश का गौरव बढ़ाया।
जी हां हम बात कर रहे हैं बासप्पा दानप्पा जत्ती की जिन्हें लोग बी डी जट्टी के नाम से भी जानते है। बी डी जट्टी सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं बने अपने पूरे जीवन काल में वे राज्यपाल और कार्यवाहक राष्ट्रपति से लेकर उपराष्ट्रपति तक की कुर्सी संभाल चुके हैं। बीडी जत्ती के अलावा देश के पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा भी ऐसे नेता है जो मध्य-प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद राष्ट्रपति की कुर्सी पर विराजमान हुए।
निःस्वार्थ सेवा और सच्ची राजनीती करने वाले बीडी जत्ती की आज 24वीं पुण्यतिथि है। आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए और श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके दिलचस्प व्यक्तित्व और राजनीतिक सफर के बारें में आपको अवगत कराते है….
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व्यक्तिगत जीवन
बीडी जत्ती का जन्म 10 सितम्बर 1913 को कर्नाटक के बीजापुर जिले में सवालगी ग्राम में हुआ था। इनका गांव मुंबई प्रेसिडेंसी की सीमा पास ही था। इसलिए वहां के लोग मराठी भाषा ही बोलते थे। इनका विवाह मात्र 10 वर्ष की आयु में वर्ष 1922 में भाभानगर की संगम्मा के साथ सम्पन्न हुआ था। बी.डी जत्ती धार्मिक और बेहद नम्र स्वभाव के व्यक्ति थे। वह जरूरतमंदों की सहायता करने के लिए हमेशा तैयार रहते थे।
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शिक्षा
बीडी जत्ती ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा ए.वी. स्कूल में की। इसके बाद बासप्पा ने सिद्धेश्वर हाई स्कूल बीजापुर से मैट्रिक की परीक्षा पास की। बाद में जत्ती ने बंबई विश्वविद्यालय से संबद्ध राजाराम कॉलेज, कोल्हापुर से कानून की पढ़ाई पूरी की। बहुत कम समय के लिए उन्होंने जमखंडी में वकालत की प्रैक्टिस भी की।
राजनैतिक सफर
बीडी जत्ती ने साल 1940 में जमखंडी नगर-निगम के सदस्य के तौर पर अपने राजनैतिक कैरियर की शुरूआत की थी। इसके बाद 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन में बासप्पा ने प्रजा परिषद पार्टी की ओर से प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद 1952 में भारतीय गणराज्य का प्रथम आम चुनाव में बासप्पा ने कांग्रेस के टिकट पर जमाखंडी सीट से विधायक का चुनाव लड़ा और उन्होंने शानदार अंतर के साथ जीत हासिल की। जमखंडी निर्वाचन क्षेत्र से तीसरी बार जीतने के बाद वे वित्त मंत्री बने और चौथे कार्यकाल के दौरान उन्होंने खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री का कार्यभार संभाला। इसके बाद जत्ती 1958 से 1962 तक मैसूर राज्य के मुख्यमंत्री भी रहे।
पुद्दुचेरी व उड़ीसा के राज्यपाल का भी कार्यभार संभाला
बीडी जत्ती ने सन् 1968 में राष्ट्रीय राजनीति के कदम रखा और पॉडिचेरी के उप राज्यपाल बने इसके बाद 1973 में उन्होंने ओडिशा के राज्यपाल का भी कार्यभार संभाला।
1974 में बने उपराष्ट्रपति
बीडी जट्टी 1974 में भारत के उपराष्ट्रपति बने। इस पद पर वह 1980 तक बने रहे। फिर देश के पांचवें राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद के निधन के बाद बासप्पा दानप्पा जत्ती को 11 फरवरी 1977 को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया। वे देश के कार्यवाहक राष्ट्रपति के पद पर 11 फरवरी 1977 से 25 जुलाई 1977 तक बने रहे। इस दौरान इन्होंने अपना दायित्व संवैधानिक गरिमा के साथ पूर्ण किया।
बीडी जट्टी का निधन
7 जून, 2002 को देश के इस महान नेता का निधन हो गया है। वे एक ऐसे इंसान थे जिन्होंने समाज में निःस्वार्थ सेवा और सच्ची राजनीती का उदाहरण पेश किया। अपने जीवन के अंतिम समय में वे बंगलौर में थे। अपने निस्वार्थ सेवा और नम्र स्वभाव के कारण वे आज भी याद किए जाते है। बीडी जट्टी, भले ही देश के निर्वाचित राष्ट्रपति नहीं रहे हो लेकिन कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में अपने छोटे से कार्यकाल में उन्होंने संवैधानिक जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।
