प्रधान के बाद अब मनन मिश्रा की बारी, दिल्ली में BCI चेयरमैन के खिलाफ सड़कों पर उतरे वकील, क्यों मांगा इस्तीफा?

Lawyers Protest in Delhi: दिल्ली में वकीलों ने BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने वकीलों और कानून छात्रों के कल्याण की अनदेखी का आरोप लगाया।
 Delhi Bar Council of India Protest
दिल्ली में BCI चैयरमैन के खिलाफ वकीलों का प्रदर्शन(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Delhi Bar Council of India Protest: दिल्ली में आज बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे मांग करते हुए वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया। वकीलों के इस प्रदर्शन को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी अपना समर्थन दिया है। प्रदर्शन को देखते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के ऑफिस के आसपास पुलिस बल की तैनाती को बढ़ा दिया गया है। 

जानकारी के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में आज ऑल इंडिया यंग एडवोकेट्स एसोसिएशन से जुड़े वकील बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी वकीलों ने  मनन कुमार मिश्रा की इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।  प्रदर्शनकारियों ने मनन मिश्रा पर वकीलों और कानून के छात्रों के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर ध्यान नहीं देने का आरोप लगाया।

बीसीआई चेयरमैन क्या है आरोप? 

प्रदर्शन में शामिल एक अधिवक्ता उमेश कुमार ने बीसीआई चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा पर वकीलों और कानून के छात्रों के कल्याण से जुड़े मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाते हुए पूछा कि बीसीआई चेयरमैन ने कानून के छात्रों और वकीलों के कल्याण के लिए एक भी काम किया है? वकील रोज हमलों का शिकार हो रहे हैं और पुलिस थानों के अंदर उनकी हत्या की जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में हैदराबाद में एक वरिष्ठ वकील की मौत हुई। क्या बीसीआई चेयरमैन ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया?

उमेश कुमार ने आरोप लगाया कि वकीलों के कल्याण के मुद्दों पर बीसीआई चेयरमैन चुप्पी साधे रहते हैं। लेकिन जब बात राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने की आती है, तो वह सबसे आगे रहते हैं। उमेश कुमार ने बीसीआई के आधिकारिक पत्रों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया।

संगठन की कमियों को दूर करने के लिए आंदोलन

वहीं, एक और अधिवक्ता रमन शर्मा ने कहा कि यह पूरी तरह से वकीलों का हमारी अपनी सबसे बड़ी संस्था के खिलाफ एक आंदोलन है ताकि संगठन के अंदर की कमियों को दूर किया जा सके और हमारी जायज़ मांगों पर दबाव डाला जा सके। चेयरमैन 14 साल से अपने पद पर हैं। उन्होंने असल में कानूनी बिरादरी के लिए क्या किया है।

उन्होंने आगे कहा कि, हम जानते हैं कि पूरे देश में पुलिस स्टेशनों में वकीलों के साथ कैसा बर्ताव किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर्स (IOs) को सात साल से कम जेल की सजा वाले अपराधों के मामलों में आरोपी लोगों को सीधे पुलिस स्टेशन से रिहा करने का अधिकार दिया।

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रमन शर्मा ने कहा पूरे भारत में क्रिमिनल लॉ प्रैक्टिस असल में खत्म हो रही है, फिर भी कोई इसके खिलाफ खड़ा नहीं हो रहा है। यह हमारी सबसे बड़ी संस्था थी। उन्हें बोलना चाहिए था। तीन बड़े कानूनों में बदलाव किया गया। लेकिन बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन चुप रहे। 

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