अकेले चले थे, पीछे रह गए! असम के लोकल चुनाव में BJP को झटका, क्षेत्रीय दल ने सिखाया सबक

Assam में हुए निकाय चुनाव में BJP और CM सरमा को झटका लगा है। लगभग पांच साल बाद बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) एक बार फिर सत्ता में वापसी की ओर बढ़ती दिख रही है। प्रारंभिक नतीजों में BPF ने बढ़त बनाई है।
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असम में लोकल बॉडी के चुनाव के लिए 22 सितंबर, 2025 को मतदान हुआ था आज नतीजे आ रहे है
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Assam Local Body Election: असम के बोडोलैंड निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के जोरदार प्रचार के बावजूद भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है। अकेले चुनाव लड़ने का फैसला भाजपा के पक्ष में जाता नहीं दिख रहा। प्रारंभिक नतीजों में, लगभग पांच साल बाद बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) सत्ता में वापसी करती नजर आ रही है। 40 सीटों वाले इस परिषद में BPF बहुमत के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गई है, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है। 22 सितंबर को मतदान संपन्न हुआ था आज चुनाव के नतीजे आ रहे हैं।

ताजा नतीजों के अनुसार, 40 में से 19 सीटों पर बीपीएफ ने बढ़त बना ली है, जबकि बहुमत के लिए 21 सीटों की जरूरत है। वहीं, अकेले दम पर चुनाव लड़ने वाली भाजपा महज 13 सीटों पर आगे है। परिषद पर वर्तमान में काबिज यूपीपीएल को 8 सीटें मिलती दिख रही हैं, जबकि 40 सीटों पर उम्मीदवार उतारने वाली कांग्रेस का इस चुनाव में खाता तक नहीं खुल सका है। 22 सितंबर को हुए मतदान के बाद अब सबकी नजरें अंतिम नतीजों पर टिकी हैं।

बिखरा जनादेश, अब गठबंधन के संकेत?

यह नतीजा इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि 2020 के चुनाव में 17 सीटें जीतकर बीपीएफ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, लेकिन तब भाजपा (9 सीटें) ने यूपीपीएल के साथ मिलकर सरकार बना ली थी। इस बार जनादेश बंटा हुआ नजर आ रहा है, जिसके बाद एक भाजपा नेता ने संकेत दिए हैं कि पार्टी बीपीएफ को समर्थन देकर सरकार बनाने का रास्ता साफ कर सकती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अंतिम नतीजों का इंतजार करना होगा। इस बार भाजपा ने 30 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जबकि 2020 में 24 सीटों पर लड़ी थी।

BPF का दिलचस्प सियासी सफर

बोडोलैंड की राजनीति में बीपीएफ एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी रही है, जिसका सियासी सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। यह वही पार्टी है जो 2006 और 2011 में कांग्रेस सरकार में भागीदार थी। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले यह कांग्रेस से अलग हो गई। इसके बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में बीपीएफ ने फिर कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, लेकिन बाद में एनडीए सरकार को अपना समर्थन दे दिया। अब एक बार फिर यह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिससे भविष्य के समीकरण काफी रोचक हो गए हैं।

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