महाकुम्भ मेले में पर्यटकों के बीच आकर्षण बनेगा अशोक स्तंभ, जनवरी में होगा धार्मिक रंग कुंभ का आगाज
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अगले वर्ष जनवरी में होने वाले महाकुम्भ में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को इलाहाबाद संग्रहालय अशोक स्तंभ और स्तंभ पर लिखी सम्राट समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति से परिचित कराने जा रहा है।
- Written By: दीपिका पाल
महाकुम्भ 2025 (सौ.सोशल मीडिया)
प्रयागराज: आने वाला साल महाकुंभ का आगाज लेकर आ रहा है जिसकी तैयारियां हो गई है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अगले वर्ष जनवरी में होने वाले महाकुम्भ में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को इलाहाबाद संग्रहालय अशोक स्तंभ और स्तंभ पर लिखी सम्राट समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति से परिचित कराने जा रहा है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। इलाहाबाद संग्रहालय के डिप्टी क्यूरेटर डॉ. राजेश मिश्र ने बताया कि संग्रहालय ने महाकुम्भ के दौरान आगंतुकों के लिए अशोक स्तंभ की छोटी प्रतिकृति को स्मृति चिह्न के रूप बनाने का फैसला किया है।
पर्यटकों के लिए रखा जाएगा
उन्होंने बताया कि महाकुम्भ के दौरान सम्राट अशोक के स्तंभ की प्रतिकृति बनाकर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रखा जाएगा। अधिकारी ने बताया कि स्तंभ पर अंकित अभिलेख प्रयाग प्रशस्ति के नाम से इतिहास में प्रसिद्ध है। उन्होंने बताया कि प्रयाग प्रशस्ति में सम्राट अशोक की पत्नी कारुवाकी ने कौशांबी में बौद्धों को आम के बाग दान किए थे, जिसके बाद सम्राट समुद्रगुप्त के अभिलेख मिलते हैं। मिश्र ने बताया कि यह अभिलेख चम्पू शैली और संस्कृत भाषा में उकेरे गए हैं और इस स्तंभ में सम्राट समुद्रगुप्त की उपलब्धियों का विशेष रूप से वर्णन किया गया है।
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समुद्रगुप्त से जुड़ा है इतिहास
उन्होंने बताया कि अखंड भारत की कल्पना को सबसे पहले साकार करने वाले सम्राट के रूप में समुद्रगुप्त को ही जाना जाता है और लगभग चौथी शती ईस्वी में प्रयाग प्रशस्ति में सम्राट समुद्रगुप्त की विजय गाथा का वर्णन किया गया है। अधिकारी ने बताया कि समुद्रगुप्त को ऐसे योद्धा के रूप में जाना जाता है, जिसे कोई भी राजा युद्ध में नहीं हरा सका और समुद्रगुप्त ने अखंड भारत के निर्माण के लिए ही ये सभी युद्ध किए थे।
