जग्गी हत्याकांड केस में अमित जोगी को बड़ी राहत, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे

Amit Jogi: सुप्रीम कोर्ट ने राम अवतार जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी की उम्रकैद की सजा पर रोक लगाई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती। 2003 के हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में मिली बड़ी राहत।
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सुप्रीम कोर्ट, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Amit Jogi Supreme Court News: अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने राम अवतार जग्गी हत्याकांड में उनकी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले पर भी स्थगन आदेश जारी किया गया है।

अमित जोगी ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उनकी अपील पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने फिलहाल उन्हें राहत दे दी है, जिससे उन्हें तुरंत जेल जाने से राहत मिल गई है।

2003 में हुई थी हत्या

यह मामला वर्ष 2003 में रायपुर के मौदहापारा इलाके में एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या से जुड़ा है। उस समय जग्गी पार्टी के कोषाध्यक्ष थे और विद्याचरण शुक्ला के करीबी माने जाते थे।

निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई

साल 2007 में निचली अदालत ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की अपील पर लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल 2026 को उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई और तीन सप्ताह में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर लगाई रोक

गौरतलब है कि 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील में हुई देरी को माफ करते हुए हाईकोर्ट को मामले की दोबारा सुनवाई का निर्देश दिया था, जिसके बाद यह फैसला आया।अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा सजा पर रोक लगाए जाने के बाद मामले की आगे की सुनवाई जारी रहेगी और अंतिम निर्णय बाद में लिया जाएगा।

कौन हैं अमित जोगी?

अमित जोगी छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख राजनीतिज्ञ और राज्य के पहले मुख्यमंत्री, दिवंगत अजीत जोगी के पुत्र हैं। वह वर्तमान में अपनी क्षेत्रीय पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (JCC) के मुख्य चेहरों में से एक हैं। अमित जोगी का जन्म अमेरिका (डलास, टेक्सास) में हुआ था, जिसे लेकर उनकी भारतीय नागरिकता और जन्मतिथि पर समय-समय पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे 2002 में भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकृत हुए थे। वह छत्तीसगढ़ की राजनीति के एक प्रभावशाली लेकिन विवादों से घिरे रहने वाले नेता हैं, जो अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

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