आंध्र प्रदेश में नई मिसाइल स्टेटिंग रेंज की होगी स्थापना, DRDO बना रहा बड़ा प्लान
कैबिनेट कमेटी ने आंध्र प्रदेश के नागायालंका क्षेत्र में नई मिसाइल टेस्टिंग रेंज विकसित करने की मंजूरी दे दी है। अब यहां नई मिसाइल परीक्षण रेंज में सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, एंटी टैंक मिसाइल और डीआरडीओ के सामरिक मिसाइल सिस्टम का परीक्षण किया जाएगा।
- Written By: रोजी सिन्हा
डीआरडीओ बनाएगा नया परीक्षण रेंज
नई दिल्ली : कैबिनेट कमेटी ने आंध्र प्रदेश के नागायालंका क्षेत्र में नई मिसाइल टेस्टिंग रेंज विकसित करने की मंजूरी दे दी है। अब यहां नई मिसाइलों का परीक्षण किया जाएगा जिसमें सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, एंटी टैंक मिसाइल और डीआरडीओ के सामरिक मिसाइल सिस्टम का परीक्षण किया जाएगा। ये परीक्षण न केवल मौजूदा मिसाइल सिस्टम के अहम पड़ाव साबित होंगे बल्कि नई पीढ़ी की मिसाइलों की भी नींव रखेंगे। बता दें कि सरकार के सूत्रों ने रविवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सीसीएस ने पिछले हफ्ते ही यह फैसला लिया है।
परमाणु से लैस है मिसाइलें
मौजूदा समय में भारत के पास 40 से अधिक तरह की मिसाइलों का जखीरा है। भारत अपनी अधिकांश मिसाइलों का परीक्षण अब्दुल कलाम द्वीप और ओडिशा के चांदीपुर परीक्षण रेंज से करता है। मगर अब आंध्र प्रदेश में नई टेस्टिंग रेंज विकसित की जाएगी। भारत की कुछ प्रमुख मिसाइलों में ब्रह्मोस, पृथ्वी-2, अग्नि-1, अग्नि-2, अग्नि-3, धनुष और प्रहार शामिल हैं।
डिफेंस सेक्टर में बढ़ेगी प्रतिबद्धता
डीआरडीओ ने बड़े स्तर पर मिसाइल परीक्षण कार्यक्रम तैयार किया है। इस दौरान पारंपरिक और स्ट्रेटेजिक मिसाइलों का परीक्षण किया जाएगा। इन परीक्षणों से देश की रक्षा क्षमताओं में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। बताया जाता है कि ये परीक्षण न केवल मौजूदा मिसाइल सिस्टम के अहम पड़ाव साबित होंगे बल्कि नई पीढ़ी की मिसाइलों की भी नींव रखेंगे। यह पहल डिफ़ेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता हासिल करने की भारत की प्रतिबद्धता को जताता है।
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