

PCOD PCOS PMOS Difference: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम महिलाओं में रीप्रोडक्टिव एज के दौरान होने वाली सबसे आम हार्मोनल समस्याओं में से एक है। पीसीओएक महिलाओं में अनियमति पीरियड्स का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी मानती है कि पीसीओएस दुनिया भर में महिलाओं में एनोव्यूलेशन और इंफर्टिलिटी का सबसे बड़ा कारण
हाल ही में मेडिकल जर्नल द लांसेट में प्रकाशित होने के बाद PCOS का नाम बदलकर Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome यानी PMOS रख दी गई। इसका उद्देश्य यह बताना है कि यह बीमारी केवल ओवरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर के हार्मोन और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है।
आइए जानते हैं कि PCOD, PCOS और PMOS में क्या अंतर है।
PCOD (Polycystic Ovarian Disease) ओवरी से जुड़ी समस्या है, ओरी मल्टीपल अविकसित अंडे बनाती है। इससे उनमें छोटे-छोटे सिस्ट डेवलप हो जाते हैं। पीसीओडी से पीड़ित महिलाओं में अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना और हार्मोनल असंतुलन देखा जा सकता है। तनाव, खराब खानपान और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। इसमें ओव्यूलेशन पूरी तरह बंद नहीं होता, इसलिए प्रजनन क्षमता पर इसका असर कम होता है। सही डाइट, नियमित व्यायाम और लाइफ स्टाइल में बदलाव से इसके लक्षण काफी हद तक नियंत्रित या कम किए जा सकते हैं।
PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) केवल ओवरी की बीमारी नहीं है। पीसीओएस पूरे शरीर को प्रभावित करने वाला हार्मोनल और मेटाबॉलिक सिंड्रोम है। इसमें शरीर में एंड्रोजन यानी पुरुष हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे ओव्यूलेशन रुक सकता है और अपरिपक्व अंडे ओवरी में जमा होने लगते हैं। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस भी जुड़ा होता है।
इसके लक्षणों में मोटापा, मुंहासे, चेहरे या शरीर पर अत्यधिक बाल और बाल झड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि यह कंडीशन लंबे समय तक बनी रहती है, तो टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और एंडोमेट्रियल कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। ओव्यूलेशन लंबे समय तक न होने के कारण गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है।
इसे ठीक करने के लिए लाइफ स्टाइल में बदलाव के साथ-साथ दवाएं, हार्मोन थेरेपी और जरूरत पड़ने पर फर्टिलिटी ट्रीटमेंट भी कराना पड़ सकता है।
PMOS (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome) वास्तव में PCOS का ही नया नाम है। इस नाम को बदलना इसलिए जरूरी समझा गया ताकि बीमारी के वास्तविक स्वरूप को बेहतर तरीके से समझाया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि पीसीओएस भ्रमित करने वाला नाम था। यह केवल ओवरी में सिस्ट बनने की समस्या है, जबकि यह पूरे शरीर के हार्मोन और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करने वाली स्थिति है।
Polyendocrine
यह बताता है कि यह बीमारी केवल प्रजनन हार्मोन तक सीमित नहीं है, बल्कि इंसुलिन, टेस्टोस्टेरोन, कोर्टिसोल सहित कई हार्मोनों को प्रभावित करती है।
Metabolic
यह दर्शाता है कि यह शरीर के ऊर्जा उपयोग (Metabolism) को प्रभावित करती है। इंसुलिन रेजिस्टेंस, सूजन (Inflammation), वजन बढ़ना और टाइप-2 डायबिटीज व हृदय रोग का खतरा इससे जुड़ा होता है।
Ovarian
यह स्वीकार करता है कि बीमारी में ओवरी की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन "Cystic" शब्द हटाया गया क्योंकि हर PCOS मरीज की ओवरी में सिस्ट नहीं होते। इसी भ्रम के कारण कई मामलों की पहचान नहीं हो पाती थी।
Syndrome
यह दर्शाता है कि यह एक जटिल सिंड्रोम है, जिसके लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं।
PCOD के अधिकांश मामलों में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव कम करना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से धीर-धीरे इसके लक्षणों में सुधार हो सकता है।
वहीं PCOS या PMOS में केवल लाइफस्टाइल बदलाव पर्याप्त नहीं होते। इस स्थिति में इंसुलिन रेजिस्टेंस और हार्मोनल असंतुलन को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं, हार्मोन थेरेपी और अन्य चिकित्सा उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है।