जानिए क्या होता हैं स्माइलिंग डिप्रेशन, इसके लक्षण पहचानकर करें ऐसे बचाव

हेल्थ एक्सपर्ट कहते है कि स्माइलिंग डिप्रेशन की पहचान के लिए किसी टेस्ट की जरूरत नहीं होती है. ये व्यक्ति के बिहेवियर से पता चलता है।स्माइलिंग डिप्रेशन से पीड़ित मरीज को नींद कम आती है और वो लगातार थकान महसूस करता है. ऐसे लोगों का उनकी हॉबीज में इंटरेस्ट खत्म हो जाता है और वो किसी चीज पर फोकस नहीं कर पाते हैं।
Smiling Depression, Health
जानिए स्माइलिंग डिप्रेशन (सौ.सोशल मीडिया)
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दुनिया में हर कोई पूरी तरह से खुश नहीं होता है उनके साथ कोई ना कोई समस्या जुड़ी होती ही हैं। इसमें गम के माहौल में होने के साथ तनाव घिरा रहता ही है कई लोग तो खुद को पूरा खो देते हैं लेकिन कई लोग हंसते-मुस्कुराते रहते है। आज हम बात कर रहे हैं ऐसे ही एक नई बीमारी स्माइलिंग डिप्रेशन के बारे में जिसमें इंसान किसी स्थिति सामान्य व्यक्ति से बिल्कुल अलग हो जाती है।

जानिए क्या होता हैं स्माइलिंग डिप्रेशन

यहां पर हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, स्माइलिंग डिप्रेशन को समझें तो यह ऐसी स्थिति होती हैं जिसमें व्यक्ति के व्यवहार में दिखने वाले लक्षणों के आधार पर स्माइलिंग डिप्रेशन की पहचान होती है। इससे पीड़ित व्यक्ति गंभीर तनाव की स्थिति में होने के बाद भी हंसकर और मुस्कुराकर अपना डिप्रेशन छिपाने की कोशिश करते हैं। ऐसा व्यक्ति अगर डिप्रेशन का शिकार है तो वो अपने हाव भाव और हंसी से इसे छिपाने की पूरी कोशिश करता है और हर समय मुस्कुराता रहता है।

स्माइलिंग डिप्रेशन के लक्षण

स्माइलिंग डिप्रेशन की स्थिति में कई बार लक्षण सामान्य होते हैं लेकिन जरूरत से ज्यादा किसी व्यक्ति की हंसी उसके इस बीमारी के लक्षण दिखलाता है। भले ही खुशदिल दिखते हों, लेकिन वो गहरी उदासी, निराशा को झेलते हैं. स्माइलिंग डिप्रेशन से पीड़ित मरीज को नींद कम आती है और वो लगातार थकान महसूस करता है. ऐसे लोगों का उनकी हॉबीज में इंटरेस्ट खत्म हो जाता है और वो किसी चीज पर फोकस नहीं कर पाते हैं।

कैसे इस स्थिति से निकले बाहर

अगर कोई आपका खास इस स्माइलिंग डिप्रेशन की समस्या से गुजर रहे हैं उन्हें इन सब से बाहर निकलने के लिए खुद प्रयास करने की जरूरत है लेकिन इसके लिए कई तरीके औऱ है।

1- इस स्थिति के लिए कॉग्नेटिव  बिहेवियरल ट्रीटमेंट (CBT) के जरिए मरीज ठीक हो सकता है।

2- स्माइलिंग डिप्रेशन से निजात पाने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव करके, कंसलटेशन के जरिए और परिवार व सपोर्ट ग्रुप की मदद के जरिए ठीक कर सकते है।

3- इस इलाज में मरीज के विचारों , व्यवहार और पैटर्न को पहचान कर उसे बदलने का प्रयास किया जाता है।

4- इसके लिए जरूरी है कि मरीज खुद भी ठीक होने के लिए प्रयास कर रहा हो, ऐसे में इस डिप्रेशन से जल्द ठीक हुआ।

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