Purple Day Epilepsy Awareness Day 2025: जानिए क्या है मिर्गी की बीमारी, पर्पल रंग से कैसे जुड़ गया इस बीमारी का कनेक्शन
मिर्गी की बीमारी के प्रति जागरूकता और इसके इलाज को बढ़ावा देने के लिए हर साल 26 मार्च को भारत सहित विश्व के 134 देशों में पर्पल डे फॉर एपिलेप्सी (Purple Day Epilepsy awareness day 2025) मनाया जाता है।
- Written By: दीपिका पाल
मिर्गी का बैंगनी रंग का क्या है कनेक्शन (सौ.सोशल मीडिया)
Purple Day Epilepsy Awareness Day 2025: आजकल कई गंभीर बीमारियों का सिलसिला बढ़ने लगा है इसमें ही मिर्गी की बीमारी (Epilepsy) भी आम बीमारियों में से एक है। मिर्गी की बीमारी को अक्सर लोग पागलपन या अजीब हरकतों वाली बीमारी समझ लेते हैं इसका इलाज अंधविश्वास के मत्थे जड़ जाता है। झारखंड में मिर्गी की बीमारी को लेकर अंधविश्वास का होना बताया जाता है जहां पर मरीज को समय पर इलाज नहीं मिल पाता है। मिर्गी की बीमारी के प्रति जागरूकता और इसके इलाज को बढ़ावा देने के लिए हर साल 26 मार्च को भारत सहित विश्व के 134 देशों में पर्पल डे फॉर एपिलेप्सी (Purple Day Epilepsy awareness day 2025) मनाया जाता है। चलिए जानते हैं मिर्गी की बीमारी का बैंगनी रंग से क्या होता है कनेक्शन।
जानिए क्या है इस दिवस का इतिहास
आपको बताते चलें कि, इस मिर्गी की बीमारी के लिए पर्पल डे का इतिहास काफी पुराना है। इस दिन की शुरुआत कनाडा में 9 साल की कैसिडी मेगन ने साल 2008 में की थी। उस दौरान कैसिडी इस बीमारी से जूझ रही थी इसके लिए लोगों को जागरूक करना चाहती थीं. इसलिए उन्होंने इस अभियान की शुरुआत की थी। पहली बार पर्पल डे 26 मार्च 2008 को मनाया गया था। इस दिवस को मनाने के लिए का उद्देश्य मिर्गी की बीमारी के प्रति समर्थन से जुड़ा हुआ है। इस कार्यक्रम में समर्थन में बैंगनी रंग (purple) के कपड़े पहनने और कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए कहा जाता है. यही वजह है कि इस दिन को Purple Day of Epilepsy भी कहा जाता है।
जानिए क्या होती है मिर्गी की बीमारी
यहां पर मिर्गी की बीमारी को समझें तो, यह एक दिमागी बीमारी है जिसमें मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिका (nerve cell) गतिविधि में गड़बड़ी होती है, जो बाद में दौरे का कारण बनती है। इस बीमारी की स्थिति में मरीज को दौरे आते है तो वहीं पर बेहोश हो सकता है या कुछ समय तक असामान्य व्यवहार कर सकता है। इस बीमारी में दिमाग में असामान्य तरंगें पैदा होती हैं. दिमाग में गड़बड़ी के चलते इंसान को बार-बार दौरे पड़ने लगते हैं. दौरा पड़ने पर दिमागी संतुलन बिगड़ जाता है और शरीर लड़खड़ाने लगता है। इस बीमारी में मरीज बेहोश हो जाता है और जब नींद होश में आता है तो जो अब तक हुआ उसे याद नहीं रहता है।
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इस बीमारी के आंकड़ों की बात करें तो, विश्व में मिर्गी के 5 करोड़ रोगी हैं. इसमें से एक करोड़ करीब 20 फीसदी मरीज भारत में ही हैं. वहीं विश्व में जहां 01 लाख की आबादी में 49 मिर्गी रोगी होते हैं तो भारत में ये आंकड़ा 139 के करीब है।
मिर्गी का कैसे करें इलाज (सौ.सोशल मीडिया)
क्या होते है बीमारी के लक्षण
यहां पर मिर्गी बीमारी के सामान्य लक्षण नजर आते है जो इस प्रकार है..
मिर्गी के लक्षण
शरीर में अकड़न
आंखों के आगे अंधेरा छा जाना
बेहोशी
मुंह से झाग आना
होंठ या जीभ काट लेना
आंखों की पुतलियों का ऊपर की तरफ खिंच जाना
अचानक से जमीन पर गिर जाना
दांत भिंचना
मिर्गी से बैंगनी रंग का क्या होता है नाता
यहां पर मिर्गी की बीमारी का बैंगनी रंग से कनेक्शन बताया गया है आखिर यही रंग क्यों लाल, पीला या हरा रंग ही क्यों नहीं। यहां पर इसका मतलब समझें तो, मिर्गी के लिए अंतर्राष्ट्रीय रंग लैवेंडर है, जो एकांत का प्रतीक रंग है. इस अभियान से बैगनी रंग के जुड़ने की कहानी काफी दिलचस्प है. दरअसल, विशेषज्ञों का दावा है कि बैगनी रंग के फूल लैवेंडर में मौजूद तत्व केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (nervous system) को आराम पहुंचाने का काम करता है. क्योंकि मिर्गी की बीमारी सेंट्रल नर्वस सिस्टम से जुड़ी होती है।
इन टेस्ट से पता करें मिर्गी है या नहीं
ब्लड टेस्ट
इलेक्ट्रोएंसेफैलोग्राफी (ईईजी)
मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग (एमआरआई)
पोज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पीईटी)
कंप्यूटराइज़्ड टोमोग्राफी (सीटी स्कैन)
सिंगल-फोटॉन एमिशन कंप्यूटराइज़्ड टोमोग्राफी (स्पेक्ट)
जानिए कैसे कर सकते है बीमारी का इलाज
आपको बताते चलें कि, यहां पर मिर्गी की बीमारी के मामले सबसे ज्यादा हो गए है। इसमें ही अमेरिका में 3.5 मिलियन से ज्यादा लोगों और दुनिया भर में 50 मिलियन से ज्यादा लोगों के मिर्गी का इलाज अब तक किया जा चुका है. इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए ये प्रीकॉशन जरुरी है, जैसे-
पर्याप्त नींद भी है जरूरी
संतुलित भोजन
शराब, तंबाकू, सिगरेट से परहेज।
